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भारतीय रेलवे दुनिया का सबसे बड़ा नेटवर्क है लेकिन महाराष्ट्र में एक ऐसी रेल लाइन मौजूद है जिसका नाता सीधे ब्रिटिश काल से जुड़ा हुआ है. शकुंतला रेलवे ट्रैक के नाम से मशहूर यह रास्ता अपने अनोखे इतिहास और मालिकाना हक की कहानियों के लिए आज भी चर्चा में बना रहता है.
कहां फैला है यह ऐतिहासिक रेलवे ट्रैक?

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यह अनोखी रेलवे लाइन महाराष्ट्र के अमरावती से मुर्तजापुर के बीच करीब 190 किलोमीटर तक फैली हुई है जिस पर सालों तक शकुंतला पैसेंजर नाम की ट्रेन दौड़ती थी. इस पूरे रूट पर आज भी अंग्रेजों के जमाने के पुराने सिग्नल और जंग लगे उपकरण देखने को मिल जाते हैं जो बीते वक्त की याद दिलाते हैं.
किस कंपनी ने बनवाई थी यह रेल लाइन?

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इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि साल 1916 में किलिक निक्सन एंड कंपनी नाम की एक ब्रिटिश फर्म ने इस ट्रैक का निर्माण करवाया था. अंग्रेजों का मुख्य मकसद अमरावती के बेहतरीन कपास को मुंबई पोर्ट तक आसानी से पहुंचाना था ताकि उसे इंग्लैंड भेजा जा सके.
क्या है इस ट्रैक का सबसे बड़ा राज?

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बताया जाता है कि देश आजाद होने के बाद भी इस नैरो गेज लाइन का मालिकाना हक काफी समय तक उसी ब्रिटिश कंपनी के पास रहा था. भारतीय रेलवे इस ट्रैक का इस्तेमाल करने के बदले ब्रिटिश कंपनी को मोटी रॉयल्टी चुकाती थी जो वाकई में हैरान करने वाली बात है.
क्यों बंद कर दी गई यहां ट्रेनों की आवाजाही?

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वक्त के साथ यह पुराना ट्रैक काफी कमजोर हो गया था जिससे ट्रेनों का सफर जोखिम भरा होने लगा और सुरक्षा पर सवाल उठने लगे. इसी वजह से साल 2016 के आसपास इस ऐतिहासिक रूट पर ट्रेनों का संचालन पूरी तरह बंद कर दिया गया था.
अब क्या होगा शकुंतला रेलवे का भविष्य?

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सरकार ने अब इस पुराने नैरो गेज ट्रैक को आधुनिक ब्रॉड गेज में बदलने का बड़ा फैसला लिया है ताकि यहाँ फिर से रेल गाड़ियां दौड़ सकें. जैसे ही निर्माण कार्य पूरा होगा इस ऐतिहासिक रूट की रौनक वापस लौट आएगी और लोगों का सफर एक बार फिर आसान हो जाएगा.