किस भारतीय ने बनवाया था ईरान का इकलौता विष्णु मंदिर? जानिए क्यों कहते हैं इसे 'गोरान'

ईरान के बंदर अब्बास में स्थित प्राचीन विष्णु मंदिर हाल ही में अमिताभ बच्चन के सोशल मीडिया पोस्ट के बाद चर्चा में आ गया है. 1892 में कजार काल के दौरान बनाया गया यह मंदिर भारतीय व्यापारियों की याद दिलाता है. आज यह इरान में विष्णु को समर्पित एकमात्र मंदिर है, जो इंडो-ईरानियन वास्तुकला का अनुपम नमूना है.

Temples in Iran
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ईरान के बंदर अब्बास में स्थित प्राचीन विष्णु मंदिर हाल ही में अमिताभ बच्चन के सोशल मीडिया पोस्ट के बाद चर्चा में आ गया है. 1892 में कजार काल के दौरान बनाया गया यह मंदिर भारतीय व्यापारियों की याद दिलाता है. आज यह इरान में विष्णु को समर्पित एकमात्र मंदिर है, जो इंडो-ईरानियन वास्तुकला का अनुपम नमूना है.  

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अमिताभ बच्चन का वायरल पोस्ट

अमिताभ बच्चन का वायरल पोस्ट2 / 9

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन ने बंदर अब्बास स्थित इस विष्णु मंदिर का वीडियो शेयर किया, जो मात्र 24 घंटे में 7 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है. उन्होंने कैप्शन में लिखा कि यह 1892 में भारतीय व्यापारियों के लिए बनाया गया प्राचीन हिंदू मंदिर है.

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ईरान में कहां है ये मंदिर?

ईरान में कहां है ये मंदिर?3 / 9

यह मंदिर ईरान के होरमुजगान प्रांत की राजधानी बंदर अब्बास में स्थित है, जो सामरिक रूप से महत्वपूर्ण हरमुज जलडमरूमध्य पर बसा है. 1892 में कजार शासनकाल के दौरान इसका निर्माण पूरा हुआ. ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, निर्माण कार्य 1888 में शुरू हुआ था और इसमें चार वर्ष लगे.

किसने बनवाया था ये मंदिर?

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मंदिर को ब्रिटिश इंडियन कंपनी में काम करने वाले भारतीय हिंदू व्यापारियों ने बनवाया था. ईरानी इतिहासकार मोहम्मद अली सदिद अल-साल्तानेह के अनुसार, उन्हें स्थानीय शासक मोहम्मद हसन साद-ओल-मालेक की अनुमति से यह मंदिर बनाने का अधिकार मिला.

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अनोखी वास्तुकला

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मंदिर की वास्तुकला पारंपरिक भारतीय शैली से अलग है और ईरानी प्रभाव वाली इंडो-ईरानियन शैली में निर्मित है. केंद्रीय कक्ष पर प्याज के आकार का गुंबद है, जिसमें कमल की नक्काशी बनी हुई है. छत पर स्पाइरल सीढ़ी और पर्याप्त सूर्य प्रकाश वाले डिजाइन ईरानी वास्तुकला की विशेषता दिखाते हैं.

निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री

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मंदिर का पूरा ढांचा मॉर्टार, कोरल स्टोन, मिट्टी और चूने से बनाया गया है. भीतरी गलियारों से जुड़े छोटे कमरे पुजारियों के रहने के लिए बनाए गए थे. केंद्रीय छड़ पृथ्वी और आकाश के अक्ष का प्रतीक माना जाता है.

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आज क्या है मंदिर की स्थिति?

आज क्या है मंदिर की स्थिति?7 / 9

1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद अधिकांश भारतीय वहां से चले गए, जिससे मंदिर अब काफी खाली है. भीतरी दीवारों की पेंटिंग्स नष्ट हो चुकी हैं, लेकिन भगवान विष्णु, बुद्ध और कृष्ण-राधा की पुरानी मूर्तियां और पेंटिंग्स अब भी मौजूद हैं. एक कमरे को छोटा संग्रहालय बनाया गया है, जहां नटराज शिव की मूर्ति रखी हुई है.

कैसे पड़ा मंदिर का 'गोरान' नाम?

कैसे पड़ा मंदिर का 'गोरान' नाम?8 / 9

स्थानीय लोग हिंदुओं को ‘गूर’ या ‘गबर’ कहते थे, इसलिए मंदिर को ‘गोरान’ के नाम से जाना जाता है. यह ईरान का राष्ट्रीय ऐतिहासिक स्मारक घोषित है. मंदिर आज भी भारतीय-ईरानी सांस्कृतिक संबंधों की जीवंत याद के रूप में खड़ा है.

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ईरान में अन्य हिंदू मंदिर

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बंदर अब्बास का यह विष्णु मंदिर ईरान का इकलौता विष्णु मंदिर है. ईरान के जाहेदान में आर्य समाज मंदिर भी मौजूद है. ये मंदिर दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंधों की मिसाल पेश करते हैं.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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