क्या है 'थंडरस्क्वाल'? यूपी में 89 लोगों की मौत, गर्मियों में ये तूफान क्यों हुआ इतना खतरनाक?

What is Thundersquall: उत्तर प्रदेश में बीती 13 मई को आए जबरदस्त आंधी तूफान और ओलावृष्टि के कारण पांच जिलों भदोही, फतेहपुर, बदायूं, चंदौली और सोनभद्र में कम से कम 89 लोगों की मौत हो गई. आखिर यह तूफान क्यों हुआ इतना खतरनाक और गर्मियों में ही क्यों होता है ऐसा?

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What is Thundersquall: उत्तर प्रदेश में बुधवार को आए भीषण तूफान ने जिस तरह की तबाही मचाई, उसने सबको झकझोर कर रख दिया है. भदोही और फतेहपुर समेत कई जिलों में बिजली गिरने और आंधी की चपेट में आने से अब तक 89 लोगों की जान जा चुकी है. लेकिन क्या आपने सोचा है कि आखिर ये 'थंडरस्क्वाल' क्या बला है, जो महज कुछ ही मिनटों में मौत का पैगाम लेकर आई? आइए, आसान भाषा में समझते हैं इसके पीछे का विज्ञान.

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क्या होता है 'थंडरस्क्वाल'?

क्या होता है 'थंडरस्क्वाल'?2 / 6

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, जब तेज कड़कड़ाती बिजली और भारी बारिश के साथ अचानक 50 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलती हैं, तो उसे 'थंडरस्क्वाल' कहते हैं. यह सामान्य आंधी से कई गुना ज्यादा ताकतवर होता है. इसकी सबसे डरावनी बात यह है कि यह बहुत कम समय के लिए आता है, लेकिन इसकी तीव्रता इतनी ज्यादा होती है कि बड़े-बड़े पेड़ों और बिजली के खंभों को उखाड़ फेंकता है.

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भीषण गर्मी में क्यों हुआ यह इतना खतरनाक?

भीषण गर्मी में क्यों हुआ यह इतना खतरनाक?3 / 6

मई के महीने में जब पारा 40-45 डिग्री के पार पहुंच जाता है, तो जमीन बहुत ज्यादा गर्म हो जाती है. ऐसे में जमीन की गर्म हवा तेजी से आसमान की तरफ उठती है. जब यह गर्म हवा ऊपर जाकर नमी वाली ठंडी हवा से टकराती है, तो विशाल काले बादलों का निर्माण होता है. यही हवा जब ठंडी होकर नीचे गिरती है, तो एक बड़े विस्फोट की तरह जमीन पर प्रहार करती है. यूपी में बुधवार को यही हुआ. भीषण गर्मी और 'वेस्टर्न डिस्टरबेंस' के मेल ने इसे 'किलर' बना दिया.

हवाओं का वह 'स्टीयरिंग व्हील' जिसने बदली दिशा

हवाओं का वह 'स्टीयरिंग व्हील' जिसने बदली दिशा4 / 6

मौसम विज्ञान में 'जेट स्ट्रीम' को हवा की एक तेज बहने वाली नदी माना जाता है. यह हमारे वायुमंडल के ऊपरी हिस्से में स्थित होती है और सतह के मौसम के लिए किसी कार के 'स्टीयरिंग व्हील' की तरह काम करती है. जब कोई 'वेस्टर्न डिस्टर्बेंस' (पश्चिमी विक्षोभ) सक्रिय होता है, तो यह स्टीयरिंग व्हील हवाओं को एक खास दिशा में मोड़ देता है, जिससे एक खतरनाक चेन रिएक्शन शुरू हो जाता है.

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'एटमॉस्फेरिक इंस्टेबिलिटी' का नतीजा

'एटमॉस्फेरिक इंस्टेबिलिटी' का नतीजा5 / 6

'साइंस ऑफ द टोटल एनवायरनमेंट' में छपे शोध की मानें तो मानसून से पहले यानी गर्मियों के मौसम में आने वाली ये आंधियां और बिजली गिरने की घटनाएं 'एटमॉस्फेरिक इंस्टेबिलिटी' का नतीजा हैं. तबाही से ठीक 24 घंटे पहले IMD ने 50 से 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की चेतावनी दी थी. वायुमंडल में बारूद की तरह स्थितियां पहले से ही तैयार थीं, बस एक ट्रिगर की जरूरत थी, जो वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के रूप में सामने आया और 89 जिंदगियां काल के गाल में समा गईं.

क्यों नहीं संभल पाए लोग?

क्यों नहीं संभल पाए लोग?6 / 6

इस तूफान की रफ्तार इतनी तेज थी कि लोगों को घर के अंदर भागने तक का मौका नहीं मिला. भदोही और फतेहपुर जैसे इलाकों में कई मौतें पेड़ गिरने और कच्ची दीवारें ढहने की वजह से हुईं. अगर आसमान का रंग अचानक गहरा काला या पीला होने लगे और तेज ठंडी हवाएं चलने लगें, तो समझ जाइए कि खतरा करीब है. ऐसी स्थिति में कभी भी पेड़ के नीचे, बिजली के खंभों के पास या कच्ची छत के नीचे न रुकें. किसी पक्के मकान या सुरक्षित इमारत में शरण लेना ही जान बचा सकता है.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

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विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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