क्या है गंगा जल संधि और इस पर क्यों छिड़ा विवाद? जानें बांग्लादेश को कितना पानी देता है भारत

भारत और बांग्लादेश के बीच दशकों पुरानी गंगा जल संधि (Ganges Water Treaty) जल्द ही समात्प होने वाली है और जैसे-जैसे इस संधि के खत्म होने की समय-सीमा पास आ रही है, वैसे-वैसे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ता भी दिखाई दे रहा है.

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इसी साल खत्म होने वाली है संधि

इसी साल खत्म होने वाली है संधि2 / 8

बांग्लादेश ने शनिवार को स्पष्ट किया कि भारत के साथ उसके द्विपक्षीय संबंधों का भविष्य काफी हद तक इस संधि के नवीनीकरण पर निर्भर करेगा. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने इस मुद्दे पर भारत सरकार को एक सीधा और कड़ा संदेश जारी किया है.

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क्या बोले आलमगीर?

क्या बोले आलमगीर?3 / 8

उन्होंने कहा, 'हम भारत सरकार को यह स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं कि बांग्लादेश की जनता की अपेक्षाओं और जरूरतों के अनुरूप, चर्चा के माध्यम से एक नई गंगा जल संधि को तुरंत लागू किया जाना चाहिए. भारत के साथ हमारे अच्छे संबंध इस बात पर निर्भर करेंगे कि इस संधि का नवीनीकरण होता है या नहीं.'

पद्मा नदी पर बन रहा मेगा बैराज

पद्मा नदी पर बन रहा मेगा बैराज4 / 8

तनाव के बीच बांग्लादेश का पद्मा बैराज प्रोजेक्ट BNP प्रवक्ता का यह बयान ऐसे समय में आया है जब कुछ ही दिन पहले बांग्लादेश सरकार ने पद्मा नदी पर एक मेगा बैराज परियोजना के निर्माण को मंजूरी दी है. आपको बता दें कि गंगा नदी को बांग्लादेश में पद्मा कहा जाता है. बांग्लादेश का कहना है कि इस बैराज का निर्माण पश्चिम बंगाल में स्थित भारत के फरक्का बैराज के नकारात्मक प्रभावों को बेअसर करने के लिए किया जा रहा है.

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चर्चा में रहता है फरक्का बैराज का मुद्दा

चर्चा में रहता है फरक्का बैराज का मुद्दा 5 / 8

बांग्लादेश के लिए फरक्का बैराज हमेशा से एक संवेदनशील और विवादित मुद्दा रहा है. बांग्लादेश का आरोप है कि इस बैराज के कारण सूखे के मौसम में पानी का प्रवाह कम हो जाता है, जिससे बांग्लादेश के तटीय क्षेत्रों में खारे पानी की घुसपैठ बढ़ गई है. इसके विपरीत, भारत हमेशा से यह कहता आया है कि साल 1972 में फरक्का बैराज को इसलिए चालू किया गया था ताकि हुगली नदी में पानी का रुख मोड़कर तलछट को साफ किया जा सके और कोलकाता बंदरगाह को सुरक्षित रखा जा सके.

क्या है गंगा जल संधि?

क्या है गंगा जल संधि?6 / 8

भारत और बांग्लादेश के बीच ऐतिहासिक गंगा जल साझाकरण संधि पर दिसंबर 1996 में नई दिल्ली में हस्ताक्षर किए गए थे. इस पर तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दस्तखत किए थे. यह संधि 30 वर्षों के लिए जल-साझाकरण व्यवस्था और नदी के पानी पर बांग्लादेश के अधिकारों को स्थापित करती है. अब यह 30 वर्षीय संधि दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाली है.

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कैसे होता है पानी का बंटवारा?

कैसे होता है पानी का बंटवारा?7 / 8

यह संधि मुख्य रूप से सूखे या कम प्रवाह वाले दिनों में फरक्का बैराज से दोनों देशों के बीच पानी के बंटवारे को नियंत्रित करती है. नियम के मुताबिक, यदि फरक्का पर पानी का प्रवाह 70,000 क्यूसेक या उससे कम होता है तो भारत और बांग्लादेश दोनों को 50-50 प्रतिशत पानी मिलता है.70,000 से 75,000 क्यूसेक के बीच प्रवाह होने की स्थिति में बांग्लादेश को निश्चित तौर पर 35,000 क्यूसेक पानी मिलता है और शेष पानी भारत के हिस्से जाता है. 75,000 क्यूसेक से अधिक प्रवाह की स्थिति में भारत अपने पास 40,000 क्यूसेक पानी रखता है और बाकी का पूरा पानी बांग्लादेश को दे दिया जाता है.

गंगा संधि क्यों है बांग्लादेश के लिए जरूरी

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जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी एनी ने बुधवार को कहा था कि प्रस्तावित पद्मा बैराज बांग्लादेश के अपने हित का मामला है. इस मुद्दे पर भारत के साथ किसी चर्चा की आवश्यकता नहीं है. प्रधानमंत्री तारिक रहमान की अध्यक्षता में आयोजित एक बैठक में राष्ट्रीय आर्थिक परिषद की कार्यकारी समिति द्वारा परियोजना को मंजूरी दी गई थी. इसके बाद एनी ने पत्रकारों से कहा, 'गंगा के संबंध में चर्चा जरूरी है, और वे प्रक्रियाएं जारी हैं.' हालांकि, कई अन्य विशेषज्ञों ने आगाह किया कि प्रस्तावित बैराज बांग्लादेश में तलछट के जमाव को बढ़ा सकता. नदी के तल को ऊपर उठाकर फरक्का बैराज के प्रतिकूल प्रभावों को और तेज कर सकता है. कोलकाता बंदरगाह पर तलछट को साफ करने और नौवहन क्षमता बनाए रखने के लिए हुगली नदी में पानी मोड़ने के लिए 2240 मीटर लंबा फरक्का बैराज बनाया गया था.

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लेखक के बारे में

Versha Singh

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वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
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