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What is NOTA Election Results 2026: भारत में जब पांच राज्यों के चुनावी नतीजों की घड़ी करीब आती है तो हर किसी की नजर उम्मीदवारों की जीत-हार पर होती है. लेकिन इन सबके बीच एक विकल्प ऐसा भी है जो बिना चुनाव लड़े चर्चा में रहता है— वह है NOTA (None of the Above) जानें नोटा से जुड़े जवाब
क्या है NOTA और कैसे हुई शुरुआत?

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आसान भाषा में कहें तो NOTA का मतलब है 'उपरोक्त में से कोई नहीं'. यदि आप मतदान केंद्र पर जाते हैं और आपको लगता है कि आपकी सीट से खड़ा कोई भी उम्मीदवार योग्य नहीं है, तो आप EVM पर सबसे नीचे वाला बटन 'NOTA' दबा सकते हैं. भारत निर्वाचन आयोग ने दिसंबर 2013 में इसकी शुरुआत की थी. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इसे पहली बार राजस्थान, मध्य प्रदेश, मिजोरम, छत्तीसगढ़ और दिल्ली के विधानसभा चुनावों में लागू किया गया था.
बैलेट पेपर से EVM तक का सफर

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ईवीएम से पहले जब पर्चियों (बैलट पेपर) से वोट डाले जाते थे, तब भी लोग अपनी नाराजगी जताते थे. उस समय बिना निशान वाला मतपत्र 'नोटेशन ऑफ वोटिंग' माना जाता था, जिसके लिए मतदाताओं को फॉर्म 49-O भरना पड़ता था. अब यही प्रक्रिया बटन दबाकर बेहद आसान हो गई है.
चुनाव परिणाम पर क्या पड़ता है असर?

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सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या NOTA चुनाव जीत सकता है? तकनीकी रूप से, NOTA को 'अवैध' या 'प्रतीकात्मक' वोट माना जाता है. यानी, अगर किसी सीट पर NOTA को सबसे ज्यादा वोट मिल जाएं, तब भी दूसरे नंबर पर रहने वाला उम्मीदवार ही विजेता घोषित किया जाएगा. यह चुनाव के नतीजों को कानूनी रूप से नहीं बदलता, लेकिन यह राजनीतिक दलों के लिए एक बड़ा 'अलर्ट' जरूर होता है.
NOTA लाने का मुख्य कारण क्या था?

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जब लोग भारी संख्या में NOTA दबाते हैं, तो पार्टियों पर दबाव बनता है कि वे आपराधिक छवि वाले लोगों को टिकट न दें. यह नागरिकों के 'अभिव्यक्ति की आजादी' के अधिकार का हिस्सा है. यह बिजली, पानी, सड़क और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी मुद्दों पर नेताओं की जवाबदेही तय करने का एक जरिया है.