क्या है नोटा? मतगणना से पहले समझें इसकी ताकत, दिग्गजों का बिगाड़ सकता है खेल

What is NOTA Election Results 2026: पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की मतगणना से पहले जानें आखिर क्या है NOTA? क्या इसके वोट किसी उम्मीदवार की जीत-हार तय कर सकते हैं? पढ़िए, मतदाताओं के इस सबसे बड़े अधिकार की पूरी कहानी.

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What is NOTA Election Results 2026: भारत में जब पांच राज्यों के चुनावी नतीजों की घड़ी करीब आती है तो हर किसी की नजर उम्मीदवारों की जीत-हार पर होती है. लेकिन इन सबके बीच एक विकल्प ऐसा भी है जो बिना चुनाव लड़े चर्चा में रहता है— वह है NOTA (None of the Above) जानें नोटा से जुड़े जवाब

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क्या है NOTA और कैसे हुई शुरुआत?

क्या है NOTA और कैसे हुई शुरुआत?2 / 5

आसान भाषा में कहें तो NOTA का मतलब है 'उपरोक्त में से कोई नहीं'. यदि आप मतदान केंद्र पर जाते हैं और आपको लगता है कि आपकी सीट से खड़ा कोई भी उम्मीदवार योग्य नहीं है, तो आप EVM पर सबसे नीचे वाला बटन 'NOTA' दबा सकते हैं. भारत निर्वाचन आयोग ने दिसंबर 2013 में इसकी शुरुआत की थी. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इसे पहली बार राजस्थान, मध्य प्रदेश, मिजोरम, छत्तीसगढ़ और दिल्ली के विधानसभा चुनावों में लागू किया गया था.

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बैलेट पेपर से EVM तक का सफर

बैलेट पेपर से EVM तक का सफर3 / 5

ईवीएम से पहले जब पर्चियों (बैलट पेपर) से वोट डाले जाते थे, तब भी लोग अपनी नाराजगी जताते थे. उस समय बिना निशान वाला मतपत्र 'नोटेशन ऑफ वोटिंग' माना जाता था, जिसके लिए मतदाताओं को फॉर्म 49-O भरना पड़ता था. अब यही प्रक्रिया बटन दबाकर बेहद आसान हो गई है.

चुनाव परिणाम पर क्या पड़ता है असर?

चुनाव परिणाम पर क्या पड़ता है असर?4 / 5

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या NOTA चुनाव जीत सकता है? तकनीकी रूप से, NOTA को 'अवैध' या 'प्रतीकात्मक' वोट माना जाता है. यानी, अगर किसी सीट पर NOTA को सबसे ज्यादा वोट मिल जाएं, तब भी दूसरे नंबर पर रहने वाला उम्मीदवार ही विजेता घोषित किया जाएगा. यह चुनाव के नतीजों को कानूनी रूप से नहीं बदलता, लेकिन यह राजनीतिक दलों के लिए एक बड़ा 'अलर्ट' जरूर होता है.

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NOTA लाने का मुख्य कारण क्या था?

NOTA लाने का मुख्य कारण क्या था?5 / 5

जब लोग भारी संख्या में NOTA दबाते हैं, तो पार्टियों पर दबाव बनता है कि वे आपराधिक छवि वाले लोगों को टिकट न दें. यह नागरिकों के 'अभिव्यक्ति की आजादी' के अधिकार का हिस्सा है. यह बिजली, पानी, सड़क और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी मुद्दों पर नेताओं की जवाबदेही तय करने का एक जरिया है.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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