देशभर में पड़ रही भीषण गर्मी के कारण मधुमक्खी पालकों के सामने कई तरह की चुनौतियां खड़ी होने लगती हैं. जैसे-जैसे बाहर का तापमान बढ़ता है वैसे-वैसे मधुमक्खियों के बक्से में भी गर्मी बढ़ जाती है जिसके कारण मधुमक्खी पालकों के लिए उनका प्रबंधन करना मुश्किल हो जाता है.
रानी मक्खी तैयार करने की प्रक्रिया बेहद अनूठी

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आपको बता दें कि इसी मौसम में मधुमक्खियो के परिवारों का विभाजन भी होता है, जिसे ‘स्वार्मिंग’ (Swarming) कहा जाता है. जब एक छत्ते से पुराना परिवार अलग होता है, तो नए परिवार को सुचारू रूप से चलाने के लिए रानी मक्खी (Queen Bee) की जरूरत होती है. नए छत्ते के लिए रानी मक्खी तैयार करने की प्रक्रिया बेहद वैज्ञानिक और अनूठी है, जिसे श्रमिक मक्खियां बखूबी अंजाम देती हैं.
संसाधनों के अभाव के कारण होता है परिवार का विभाजन

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वहीं, एक्सपर्ट्स के अनुसार, गर्मी बढ़ते ही मधुमक्खियों के परिवारों में विभाजन यानी स्वार्मिंग की समस्या सबसे पहले होती है. यह विभाजन परिवार बढ़ने या संसाधनों के अभाव के कारण होता है. विभाजन के समय पुरानी रानी मक्खी 60:40 के अनुपात में अपने साथ कुछ मधुमक्खियों को लेकर चली जाती है. ऐसी स्थिति में छत्ते में बचे हुए भ्रूण (Larva) से नई रानी मक्खी तैयार की जाती है. मधुमक्खी पालन में मुख्य रूप से पांच तत्व होते हैं, जिसमें शहद, रॉयल जेली, प्रोपोलिस, मोम और पॉलेन. श्रमिक मक्खियां भ्रूण को विशेष रूप से ‘रॉयल जेली’ खिलाकर नई रानी मक्खी के रूप में विकसित करती हैं.
भीषण गर्मी और परिवार विभाजन की चुनौती

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बढ़ते तापमान के कारण ही मधुमक्खियों के छत्तों में गर्मी का स्तर भी काफी बढ़ जाता है. इस मौसम में मधुमक्खियों के कुनबे में बढ़ोतरी होती है और स्थान की कमी होने लगती है. स्थान और संसाधनों की कमी के चलते छत्ते में विभाजन की स्थिति पैदा होती है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में ‘स्वार्मिंग’ कहा जाता है. जब यह विभाजन होता है, तो पुरानी रानी मक्खी छत्ते की लगभग 60 प्रतिशत आबादी को अपने साथ लेकर दूसरे स्थान पर चली जाती है, जिससे पुराने छत्ते में केवल 40 प्रतिशत मक्खियां ही रह जाती हैं.
नई रानी मक्खी की क्यों पड़ती है जरूरत?

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पुरानी रानी मक्खी के चले जाने के बाद छत्ते का संतुलन बिगड़ने का खतरा रहता है. किसी भी मधुमक्खी के परिवार को सुचारू रूप से चलाने और वंश बढ़ाने के लिए एक स्वस्थ रानी मक्खी की सबसे अधिक जरूरत होती है. पूरे परिवार के संचालन और सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरी तरह से रानी मक्खी पर ही निर्भर करती है. इसलिए, जैसे ही पुरानी रानी छत्ता छोड़ती है, बची हुई श्रमिक मक्खियां तुरंत एक नई रानी मक्खी तैयार करने की प्रक्रिया में जुट जाती हैं.
रॉयल जैली का क्या है रोल?

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मधुमक्खी पालन के दौरान छत्ते से पांच मुख्य तत्व प्राप्त होते हैं, जिनमें शहद, मोम, प्रोपोलिस, पॉलेन और रॉयल जेली शामिल हैं. नई रानी मक्खी को विकसित करने में ‘रॉयल जेली’ (Royal Jelly) का रोल सबसे ज्यादा अहम होता है. श्रमिक मक्खियां छत्ते में मौजूद स्वस्थ भ्रूण या कीट, जो अभी गर्भ अवस्था में होते हैं, उन्हें सामान्य भोजन के बजाय लगातार रॉयल जेली खिलाना शुरू कर देती हैं. यह विशेष पोषक तत्व भ्रूण के शारीरिक विकास को तेजी से बढ़ाता है और उसे रानी मक्खी में तब्दील कर देता है.
रानी मक्खी देती है छत्ते को नया जीवन

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श्रमिक मक्खियों द्वारा दी जाने वाली लगातार रॉयल जेली से वह साधारण भ्रूण पूर्ण रूप से विकसित होकर एक नई, शक्तिशाली रानी मक्खी का रूप ले लेता है. इस वैज्ञानिक और प्राकृतिक प्रक्रिया के माध्यम से तैयार हुई नई रानी मक्खी छत्ते की कमान संभालती है और अंडों का उत्पादन शुरू करती है. इस तरह, बढ़ते तापमान और विभाजन के संकट के बावजूद, श्रमिक मक्खियों की सूझबूझ और रॉयल जेली के सही इस्तेमाल से छत्ते को एक नया जीवन और नया नेतृत्व मिलता है.