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ईरान के खिलाफ जारी अमेरिकी और इजरायली संघर्ष फिलहाल खत्म होता नजर नहीं आ रहा है. सीजफायर के बीच कई बार ईरान और अमेरिका के बीच शांतिवार्ता आयोजित करने की कोशिश की गई, लेकिन अभी तक किसी भी देश की तरफ से कोई सकारात्मक अप्रोच नहीं मिल रहा.
ईरान का सीक्रेट महाशक्तिशाली हथियार

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इस बीच अमेरिका के खिलाफ ईरान कई तरह के खतरनाक हथियारों की टेस्टिंग कर रहा है. ईरान के एक गुप्त महाशक्तिशाली हथियार ने अमेरिका ही नहीं दुनियाभर की टेंशन बढ़ा दी है. बताया जा रहा है कि ईरान का ये हथियार इतना खतरनाक है कि अमेरिकी पनडुब्बियों के चीथड़े उड़ा सकता है.
अमेरिका को आ सकता है 'हार्ट अटैक'

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ईरान के गुप्त हथियार का नाम 'हूट' टॉरपीडो बताया जा रहा है, जो अमेरिकी नौसेना के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुका है. ये ऐसा हथियार बताया जा रहा है जो जहाजों और पनडुब्बियों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है. ईरानी नौसेना प्रमुख शहरम ईरानी ने इसे लेकर सीधे अमेरिका के लिए इशारों में चेतावनी भी दी है, उन्होंने कहा कि इस नए हथियार से अमेरिका को 'हार्ट अटैक' भी आ सकता है.
हूट टॉरपीडो क्या है?

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हूट का अर्थ फारसी में 'व्हेल' होता है. ये टॉरपीडो ईरान की तरफ से विकसित एक सुपर‑कैविटेटिंग टॉरपीडो बताया जाता है, जो दुनिया के सबसे तेज पानी के अंदर चलने वाले हथियारों में शामिल माना जा रहा है. इसकी स्पीड लगभग 360 किलोमीटर प्रति घंटा होती है, जो सामान्य टॉरपीडो की तुलना में चार‑चार गुना तेज है.
कैसे काम करती है सुपर‑कैविटेशन तकनीक?

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हूट दरअसल सोवियत युग की विकसित 'सुपर‑कैविटेशन' तकनीक पर आधारित बताया जाता है, जिसमें टॉरपीडो के आसपास गैस का झटका बनकर उसे एक तरह की नकली 'एयर रनवे' दे देता है. इस गैस‑बबल की मदद से हथियार पानी के घने माध्यम में घसीटे बिना सीधे गोली की तरह आगे बढ़ता है, जिससे घर्षण और प्रतिरोध न्यूनतम रहता है.
रूस ने तैयार की थी ये तकनीक

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यही वह तकनीक है जिसे रूस ने अपने श्क्वाल टॉरपीडो में 1990 के दशक में शुरू किया था, और ईरान अब इसे अपने खनिजों पर लागू कर रहा है. विशेषज्ञों के मुताबिक ईरान का दावा यह है कि हूट न केवल अत्यधिक गति से बल्कि 200 किलो से अधिक उच्च‑विस्फोटक वारहेड लेकर चल सकता है, जो जहाजों और पनडुब्बियों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है.
क्या है इस हथियार की कमजोरी?

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हालांकि, इस तेज गति का उल्टा असर यह है कि ईरानी हूट और रूस का श्क्वाल दोनों की मानी गई सीमा महज 15 किलोमीटर के आसपास है, जबकि पारंपरिक टॉरपीडो 30 किलोमीटर तक जाने की क्षमता रखते हैं. दूसरे शब्दों में, यह हथियार निकट दूरी के युद्ध की तकनीक है, जो टीम वर्क और घुसपैठ की रणनीति पर निर्भर करता है.
क्या यह अमेरिकी विमानवाहक पोत को डुबो सकता है?

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रक्षा विशेषज्ञ संदीप उन्निथन समेत कई विश्लेषक मानते हैं कि नैदानिक रूप से हूट टॉरपीडो अमेरिकी विमानवाहक पोत को आसानी से नहीं डुबो सकता, क्योंकि ये जहाज बहुत गहरे बख्तरबंद ढांचे, डबल या ट्रिपल हल और विशाल तैरने की क्षमता से लैस होते हैं.
कैसे बचेगा अमेरिकी युद्धपोत?

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इन विमानवाहक पोतों के साथ कई डिस्ट्रॉयर, क्रूजर, पनडुब्बियां और विमान तैनात रहते हैं, जिससे 'कैरियर स्ट्राइक ग्रुप' का विशाल चौकीदारी जाल बन जाता है. इसीलिए ईरान के लिए 15 किलोमीटर की सीमा वाले हूट को इतने विशाल और चौकस समूह के बीच घुसाकर ताकतवर टक्कर देना रणनीतिक रूप से नामुमकिन जैसा हो जाता है.
घर में शेर बन सकता है ईरान

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विशेषज्ञों का कहना है कि संकरे जलमार्ग जैसे हॉर्मुज जैसे क्षेत्रों में ईरान की घरेलू जानकारी और छोटी‑छोटी नौसेना इकाइयां ऐसे टेस्ट कर सकती हैं, जहां अमेरिकी बेड़े की गतिशीलता सीमित रह जाती है. वैश्विक रक्षा विश्लेषण में यह स्वीकार किया जाता है कि हूट एक 'सरप्राइज फैक्टर' बन सकता है, लेकिन पूरी तरह से गेम‑चेंजर नहीं है.