Independence Day Special: देश के लिए कुर्बान हुईं ये वीर महिलाएं, आजादी के इतिहास में दर्ज हैं उनके नाम

आजादी की लड़ाई में सिर्फ पुरुषों ने अपना योगदान नहीं दिया, बल्कि कई महिलाएं भी आगे रही हैं. आज देशभर में 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाया जा रहा है. आइए इस मौके पर जानते हैं कि इतिहास में किन महिलाओं का नाम दर्ज किया है.

indian women freedom fighters
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आजादी की लड़ाई में शहीद हुईं वीर महिलाएं. Image Credit- Freepik, News24 and AI

15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस सिर्फ तिरंगे और देशभक्ति के जज्बे का दिन नहीं, बल्कि उन अनगिनत वीरों को याद करने का अवसर भी है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया. आज के दिन आजादी के इतिहास को याद किया जाता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस संघर्ष में महिलाएं भी पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रही हैं. किसी ने अंग्रेजों के खिलाफ हथियार उठाए तो किसी ने तिरंगा थामकर गोलियों का सामना किया. आजादी के इतिहास में ऐसी कई वीर महिलाओं के नाम दर्ज हैं, जिनका साहस और बलिदान आज भी देशवासियों को प्रेरणा देता है.

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बेगम हजरत महल

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1857 के विद्रोह में अवध की बेगम हजरत महल ने अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा संभाला. उन्होंने लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व किया और ब्रिटिश सत्ता के सामने झुकने से इनकार कर दिया. इसे भी पढ़ें- 80वें स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी की खास पगड़ी ने खींचा ध्यान, जानिए इस शाही साफे की खासियत

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रानी लक्ष्मीबाई

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1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों के खिलाफ अदम्य साहस दिखाया. उनका नाम भारतीय स्वतंत्रता की लड़ाई की वीरता का प्रतीक बन चुका है.

कनकलता बरुआ

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असम की कनकलता बरुआ ने भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान महज 17 साल की उम्र में तिरंगा फहराने के लिए जुलूस  निकाला. 20 सितंबर 1942 को गोहपुर पुलिस स्टेशन के पास ब्रिटिश पुलिस की गोली से वह शहीद हो गईं.

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गांधी बुरी

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गांधी बुरी के नाम से मशहूर मातंगिनी हाजरा भारत छोड़ो आंदोलन का हिस्सा थीं. 29 सितंबर 1942 को तामलुक पुलिस स्टेशन की ओर तिरंगा लेकर बढ़ते हुए ब्रिटिश पुलिस की गोलियों का शिकार हुई थीं. गोली लगने के बाद भी आगे बढ़ती रहीं, लेकिन फिर शहीद हो गईं.

कैप्टन लक्ष्मी सहगल

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आजाद हिंद फौज में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करने वाली कैप्टन लक्ष्मी सहगल ने रानी झांसी रेजिमेंट का नेतृत्व किया. यह महिला सैनिकों की एक खास रेजिमेंट थी, जिसमें भारत की आजादी के लिए लड़ने वाली युवतियां शामिल थीं. इसे भी पढ़ें- 15 अगस्त की पार्टी में छा जाएंगी ये 10 तिरंगा डिशेज, हर कोई पूछेगा रेसिपी

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लेखक के बारे में

Shadma Muskan

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शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
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