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15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस सिर्फ तिरंगे और देशभक्ति के जज्बे का दिन नहीं, बल्कि उन अनगिनत वीरों को याद करने का अवसर भी है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया. आज के दिन आजादी के इतिहास को याद किया जाता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस संघर्ष में महिलाएं भी पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रही हैं. किसी ने अंग्रेजों के खिलाफ हथियार उठाए तो किसी ने तिरंगा थामकर गोलियों का सामना किया. आजादी के इतिहास में ऐसी कई वीर महिलाओं के नाम दर्ज हैं, जिनका साहस और बलिदान आज भी देशवासियों को प्रेरणा देता है.
रानी लक्ष्मीबाई

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1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों के खिलाफ अदम्य साहस दिखाया. उनका नाम भारतीय स्वतंत्रता की लड़ाई की वीरता का प्रतीक बन चुका है.
कनकलता बरुआ

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असम की कनकलता बरुआ ने भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान महज 17 साल की उम्र में तिरंगा फहराने के लिए जुलूस निकाला. 20 सितंबर 1942 को गोहपुर पुलिस स्टेशन के पास ब्रिटिश पुलिस की गोली से वह शहीद हो गईं.
गांधी बुरी

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गांधी बुरी के नाम से मशहूर मातंगिनी हाजरा भारत छोड़ो आंदोलन का हिस्सा थीं. 29 सितंबर 1942 को तामलुक पुलिस स्टेशन की ओर तिरंगा लेकर बढ़ते हुए ब्रिटिश पुलिस की गोलियों का शिकार हुई थीं. गोली लगने के बाद भी आगे बढ़ती रहीं, लेकिन फिर शहीद हो गईं.