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मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के बीच ईरान की न्याय व्यवस्था और वहां पर दी जाने वाली मौत की सजा को लेकर एक बार फिर से चर्चाएं तेज हो गई हैं. सख्त इस्लामी कानूनों के चलते यहां अपराधियों को ऐसी सजा दी जाती है जिसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाएगी. हाल के वर्षों में ईरान में फांसी की सजा के मामलों ने पिछले तीन दशकों के रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया है. लेकिन क्या वाकई यहां पर हर गुनहगार को बीच चौराहे पर लटकाया जाता है. आज हम जानेंगे ईरान की उस कानूनी प्रक्रिया और सजा के तरीकों के बारे में जो दुनिया भर में लोगों के बीच सुर्खियां बनी रहती हैं.
फांसी देने के मामले में ईरान सबसे आगे

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ईरान में मौत की सजा देने के लिए मुख्य रूप से फांसी के फंदे का इस्तेमाल किया जाता है. हाल के आंकड़ों पर नजर डालें तो मार्च 2026 तक ईरान दुनिया में सबसे ज्यादा फांसी की सजा देने वाले देशों की लिस्ट में टॉप पर है. संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट बताती है कि अकेले साल 2025 में यहां 1500 से ज्यादा लोगों को फांसी की सजा दी गई. यह संख्या पिछले 35 सालों में सबसे ज्यादा है, जो ईरान के सख्त कानूनी रवैये को भी दिखाती है.
बीच चौराहे पर सजा

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अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि क्या सच में ईरान में सरेआम फांसी दी जाती है? तो इसका जवाब हां है. हालांकि ज्यादातर मृत्युदंड जेल की चारदीवारी में ही दिए जाते हैं लेकिन कुछ विशेष रूप से और गंभीर मामलों में अपराधी को सार्वजनिक रूप से भी एक स्थान पर लटकाया जाता है. कानून के अनुसार, अपराध बहुत ज्यादा संगीन हो तो अपराधी को उसी जगह पर सार्वजनिक रूप से फांसी दी जाती है जहां उसने जुर्म किया होता है. इसका मकसद समाज में एक कड़ा संदेश देना और खौफ पैदा करना होता है.
चार कैटेगरी में बंटा है इस्लामी दंड विधान

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ईरान की अदालतें इस्लामिक पीनल कोड के आधार पर काम करती हैं. यहां अपराधों को चार मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है. जिसमें पहली कैटेगरी है Qusas यानी बदला. इसमें पीड़ित परिवार को अपराधी से बदला लेने का हक मिलता है. दूसरी कैटेगरी Hadd है, जो सीधे भगवान के खिलाफ किए गए अपराध माने जाते हैं. तीसरी Tazir और चौथी रोकने वाले अपराध Deterrent Crimes हैं. इन श्रेणियों के आधार पर ही तय किया जाता है कि अपराध को किस तरह की सजा दी जाएगी.
कौन से अपराध के लिए मिलती है मौत की सजा?

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ईरान में केवल हत्या के लिए ही मौत की सजा नहीं दी जाती है, बल्कि यहां ऐसे कई अपराध हैं जिनमें सीधा मृत्युदंड का प्रावधान है. जिसमें बलात्कार, बच्चों से छेड़छाड़, आतंकवाद और नशीली दवाओं की तस्करी के अलावा समलैंगिकता, वेश्यावृत्ति, अपहरण और चोरी जैसे मामलों में भी फांसी की सजा दी जाती है. इतना ही नहीं, धर्मत्याग, ईशनिंदा और सरकार के खिलाफ विद्रोह करने वालों को भी ईरान में मौत की सजा दी जाती है. कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम फैसला सुनाया जाता है.
ड्रग्स तस्करी और प्रदर्शनकारियों को भी सजा

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आंकड़े बताते हैं कि साल 2025 में दी गई कुल फांसियों में से लगभग 47 प्रतिशत मामले दवाओं (ड्रग्स) की तस्करी से जुड़े थे. इसके अलावा देश में होने वाले विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए भी सख्त रुख अपनाया गया है. जनवरी 2026 की शुरुआत में ही कम से कम 52 लोगों को फांसी दी गई, जिसकी पुष्टि विभिन्न ह्यूमन राइट्स ग्रुप्स ने की है.