कैसे होती है CBI चीफ की नियुक्ति, सैलरी से लेकर पावर तक; जानें सबकुछ

हालांकि इस बीच एक सवाल जो चर्चा में है वो ये है कि CBI चीफ के पास आखिर कितनी ताकत होती है और उनकी सैलरी क्या होती है वगैरह-वगैरह... तो चलिए जानते हैं कि सीबीआई का इतिहास क्या है? सीबीआई चीफ की नियुक्ति कैसे होती है? सीबीआई के पास क्या-क्या पावर होते हैं? 

cbi chief salary and power
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CBI का क्या है इतिहास?

CBI का क्या है इतिहास? 2 / 7

दूसरे विश्व युद्ध के समय भ्रष्टाचार के मामलों की जांच के लिए 1941 में ब्रिटिश सरकार स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट का गठन किया गया. 1943 में फिर स्पेशल पुलिस फोर्स का गठन हुआ. युद्ध खत्म होने के बाद 1946 में दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट एक्ट लागू किया गया. तब इसे स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट ही कहा जाता था. 1963 में इसका नाम सीबीआई रखा गया.

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क्या है CBI का काम?

क्या है CBI का काम?3 / 7

भ्रष्टाचार से निपटनाः केंद्रीय कर्मचारियों के भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के मामलों से निपटना. आर्थिक अपराध से निपटनाः बैंक धोखाधड़ी, विदेशी मुद्रा उल्लंघन और तस्करी से निपटना. विशेष अपराध से निपटनाः आतंकवाद, संवेदनात्मक हत्याएं और अन्य अपराध से निपटना.

CBI के पास है कितनी ताकत?

CBI के पास है कितनी ताकत?4 / 7

सीबीआई किसी भी पब्लिक सर्वेंट को गिरफ्तार कर सकती है, जब जांच के लिए उसे गिरफ्तार किया जाना जरूरी है या जब एजेंसी को लगे कि आरोपी भाग सकता है या सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है. सीबीआई बिना वारंट के भी गिरफ्तार कर सकती है. ये केंद्र के अधीन है, लेकिन ये किसी मामले की जांच तभी करती है जब केंद्र से या हाईकोर्ट-सुप्रीम कोर्ट से आदेश मिलता है. मामला किसी राज्य का है तो जांच के लिए वहां की राज्य सरकार की अनुमति जरूरी होती है.

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कैसे होती है CBI चीफ की नियुक्ति?

कैसे होती है CBI चीफ की नियुक्ति?5 / 7

सीबीआई के प्रमुख की नियुक्ति तीन सदस्यों वाली अपॉइंटमेंट कमेटी करती है. इस कमेटी में प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और लोकसभा में विपक्ष के नेता भी होते हैं. अंगर लोकसभा में विपक्ष का कोई नेता नहीं है तो फिर सदन की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता इस कमेटी का हिस्सा होते हैं. गृह मंत्रालय योग्य IPS अधिकारियों की एक सूची तैयार करता है. समिति की बैठक होती है और वह बहुमत से निदेशक का चयन करती है. इसके बाद केंद्र सरकार द्वारा नियुक्ति की जाती है.

कार्यकाल पर होता रहा है विवाद

कार्यकाल पर होता रहा है विवाद6 / 7

सीबीआई चीफ का कार्यकाल दो साल के लिए फिक्स होता है, लेकिन इसे पांच साल तक के लिए बढ़ाया जा सकता है. दरअसल, पहले कार्यकाल सिर्फ दो साल का ही होता था, लेकिन 2021 में सरकार ने दिल्ली पुलिस एस्टेब्लिशमेंट कानून में संशोधन कर दिया गया. इस संशोधन के बाद सीबीआई चीफ का कार्यकाल पांच साल तक बढ़ाया जा सकता है. हालांकि, दो साल तो फिक्स ही रहेगा. उसके बाद अगर समिति को लगता है तो एक-एक साल करके तीन साल तक कार्यकाल और बढ़ाया जा सकता है. दरअसल, 2020 में ईडी के तत्कालीन चीफ संजय कुमार मिश्रा का कार्यकाल बढ़ा दिया गया था. फिर ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया था. तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि रिटायर होने से ठीक पहले अधिकारियों का कार्यकाल सिर्फ दुर्लभ और असाधारण मामलों में ही बढ़ाया जाना चाहिए और वो भी शॉर्ट पीरियड के लिए. इसके बाद ही सरकार पहले अध्यादेश और फिर बिल लेकर आई थी. हालांकि, इस पर भी विवाद हुआ था.

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कितनी मिलती है सीबीआई चीफ को सैलरी?

कितनी मिलती है सीबीआई चीफ को सैलरी?7 / 7

केंद्र सरकार ने सीबीआई और ईडी प्रमुख की सैलरी को कुछ नए आदेश जारी किए थे. जिसमें ये बताया गया था कि सीबीआई और ईडी के प्रमुखों को सचिव स्तर के आईएएस अफसरों के बराबर ही सैलरी मिलेगी. सचिव स्तर के आईएएस अफसरों को लेवल 17 की सैलरी मिलती है. सबसे सीनियर आईपीएस अफसरों को पहले लेवल 16 की सैलरी मिलती थी. लेकिन अब उन्हें भी लेवल 17 की सैलरी मिलेगी. इस लेवल में अफसरों को हर महीने 2.25 लाख रुपये की सैलरी मिलती है. इसमें अभी भत्ते शामिल नहीं हैं. भत्ते वगैरह सब मिलाकर ये सैलरी और ज्यादा पहुंच जाती है.

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लेखक के बारे में

Versha Singh

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वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
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