Tri Jyeshta Dosha: ज्येष्ठ मास में क्यों नहीं करते ज्येष्ठ संतान का विवाह, जानें क्या है 'त्रिज्येष्ठ दोष'

Tri Jyeshta Dosha: 2 मई 2026 से शुरू ज्येष्ठ मास में ज्येष्ठ संतान का विवाह वर्जित माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, आइए जानते हैं, त्रिज्येष्ठ दोष क्या है और क्यों है खतरनाक?

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ज्येष्ठ मास ज्येष्ठ संतान का विवाह वर्जित क्यों?

ज्येष्ठ मास ज्येष्ठ संतान का विवाह वर्जित क्यों?2 / 6

Tri Jyeshta Dosha: द्रिक पंचांग के अनुसार, सनातन धर्म का तीसरा महीना ज्येष्ठ मास 2 मई 2026 से शुरू हो गया है। इस बार इसमें अधिक मास या पुरुषोत्तम मास का संयोग भी है, जिससे यह महीना करीब 59 दिनों तक रहेगा। शास्त्रों में ज्येष्ठ मास के दौरान घर के सबसे बड़े बेटे या बड़ी बेटी यानी ज्येष्ठ संतान का विवाह वर्जित बताया गया है। इसका मूल कारण कारण है- 'त्रिज्येष्ठ दोष'। आइए विस्तार से जानते हैं, यह दोष क्या है, क्यों इतना खतरनाक माना जाता है और किन परिस्थितियों में इसका अपवाद संभव है?

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तीन 'ज्येष्ठ' का संगम बनता है भारी दोष

तीन 'ज्येष्ठ' का संगम बनता है भारी दोष3 / 6

त्रिज्येष्ठ दोष तब बनता है जब तीन चीजें एक साथ हो जाएं – पहला, ज्येष्ठ मास यानी जो महीना अभी चल रहा है, दूसरा, ज्येष्ठ संतान यानी परिवार का सबसे बड़ा बेटा या बेटी, और तीसरा, ज्येष्ठा नक्षत्र यानी विवाह का मुहूर्त जब इसी नक्षत्र में पड़े। गार्गी संहिता जैसे ग्रंथों के अनुसार, इन तीनों के एक साथ होने पर विवाह करना अशुभ फल देता है। यह दोष केवल ज्येष्ठ संतान पर ही लागू होता है, छोटे भाई-बहन इससे मुक्त रहते हैं।

वैवाहिक जीवन में कलह और संकट

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मान्यताओं के अनुसार, त्रिज्येष्ठ दोष में विवाह करने से पति-पत्नी के बीच सामंजस्य नहीं बनता। बेवजह लड़ाई-झगड़े होते हैं, मानसिक तनाव बना रहता है। यहां तक कि ज्येष्ठ संतान के लिए स्वास्थ्य समस्याएं या अकाल मृत्यु की आशंका भी जताई गई है। ज्योतिष में ज्येष्ठ नक्षत्र को गंडमूल नक्षत्रों में गिना जाता है, जो अपने आप में संवेदनशील होता है। जब यह नक्षत्र ज्येष्ठ मास और ज्येष्ठ संतान से जुड़ता है, तो प्रभाव और गहरा हो जाता है।

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कब अपवाद होता है यह नियम?

कब अपवाद होता है यह नियम?5 / 6

यह नियम केवल पहली संतान पर लागू नहीं होता, अगर केवल एक ही 'ज्येष्ठ', जैसे सिर्फ ज्येष्ठ मास हो, तो विवाह किया जा सकता है। दो ज्येष्ठ (महीना और वर या कन्या) को मध्यम फलदायी माना गया है, लेकिन तीनों ज्येष्ठ आने पर विवाह पूरी तरह वर्जित है। छोटे बेटे या छोटी बेटी का विवाह इस महीने में बिना किसी दोष के किया जा सकता है। इसके अलावा, यदि किसी कारणवश ज्येष्ठ संतान का विवाह इसी महीने करना जरूरी हो, तो किसी योग्य ज्योतिषी से दोष निवारण उपाय अवश्य करा लें।

बिना ज्योतिष सलाह के न लें निर्णय

बिना ज्योतिष सलाह के न लें निर्णय6 / 6

यदि ज्येष्ठ संतान का विवाह टाला न जा सके, तो किसी विद्वान ज्योतिषी से संपर्क करें। कुछ विशेष शुभ मुहूर्तों या दोष निवारण अनुष्ठानों के जरिए इस दोष का प्रभाव कम किया जा सकता है। वैशाख, फाल्गुन या मार्गशीर्ष मास को ज्येष्ठ संतान के विवाह के लिए अधिक शुभ माना गया है। इस बार ज्येष्ठ माह लंबा है (2 मई से 29 जून), इसलिए थोड़ा धैर्य रखकर दोषमुक्त महीने में शादी रचाना ही बेहतर रहेगा।

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लेखक के बारे में

Shyamnandan

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श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.
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