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Passport New Update: केंद्र सरकार भविष्य में पासपोर्ट को लेकर एक कानून बना सकती है। अभी सुझाव दिया गया है और सरकार से सुझाव पर गंभीरता से मंथन करके कानून बनाने की अपील की गई है। मुद्दा काफी गंभीर है और अगर सरकार ने प्रस्तावित कानून बना दिया तो पासपोर्ट रद्द हो सकता है।

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बजट सत्र के दौरान राज्यसभा में विदेश गए लोगों के मां-बाप का मुद्दा उठाया गया था। बच्चों के विदेश जाने के बाद मां-बाप की देखभाल और सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई थी। सुझाव दिया गया है कि विदेश जाने वाले लोगों से एफिडेविट लिया जाए कि वे अपनी आय का एक हिस्सा मां-बाप की देखभाल के लिए देंगे।

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सुझाव दिया गया कि हर 6 महीने में विदेश जाने वाले लोगों के मां-बाप से भी एक संतुष्टि प्रमाण पत्र लिया जाना अनिवार्य किया जाए, जिसमें वे पुष्टि करेंगे कि विदेश में रहते हुए भी बच्चे उनके संपर्क में हैं। उन्हीं जरूरी मदद कर रहे हैं और उनकी देखभाल भी वे अच्छे तरीके से कर रहे हैं। सप्ताह में एक बार फोन पर हाल चाल पूछना भी अनिवार्य किया जाए।

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केंद्र सरकार से मांग की गई है कि अगर विदेश जाने वाले एफिडेविट नहीं देते हैं या मां-बाप असंतुष्टि जताते हैं तो उनका पासपार्ट रद्द कर दिया जाए और उन्हें भारत वापस बुलाया जाएगा। सरकार को इस सुझाव पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और एक कानून बनाकर नियमों को लागू करना चाहिए, ताकि मां-बाप ठीक और सुरक्षित रहें।

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मुद्दा उठाते हुए राज्यसभा में बताया गया कि पिछले साल 2025 में 500 से ज्यादा मामले सामने आए थे। जिनमें बच्चों के विदेश जाने के बाद मां-बाप बेहद खराब हालत में रह रहे हैं या उनकी मौत हो गई और विदेश में रहने वाले बच्चे अंतिम संस्कार में भी नहीं आए। यह मद्दा न केवल भावनात्मक है, बल्कि सामाजिक और कानूनी तौर पर भी बेहद गंभीर है।

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बता दें कि भारत में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण अधिनियम 2007 लागू है। इस एक्ट के तहत युवाओं को माता-पिता की आर्थिक, शारीरिक और भावनात्क देखभाल के लिए जिम्मेदार बताया गया है। ऐसा नहीं होने पर मां-बाप को पुलिस शिकायत करने और बच्चों से मासिक गुजारा भत्ता लेने का हकदार बनाया गया है।

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वहीं यह कानूनी विदेशों में बसे लोगों पर लागू नहीं होता है। विदेश जाने वाले लोग अकसर मां-बाप की देखभाल से मुंह मोड़ जाते हैं या कई लोग बस खर्चा देने भर की जिम्मेदारी निभाते हैं। इसके अलावा कोई जिम्मेदारी नहीं समझते। इसलिए संसद में प्रस्ताव पेश करके विदेश मंत्रालय और पासपोर्ट अथॉरिटी से कड़े नियम बनाने की अपील की गई है।