संसद में सिर्फ हंगामा क्यों? हर मिनट लाखों, प्रतिदिन खर्च होते हैं इतने करोड़ रुपये
संसद में बजट सत्र चल रहा है। इस दौरान विपक्ष के हंगामा के चलते रोज लोक सभा और राज्य सभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ रही है। कभी आपने सोचा है कि लोक सभा और राज्य सभा में हंगामे के साथ पूरा सत्र खत्म हो जाता है और नतीजा शून्य या नहीं के बराबर रहा है तो इसमें खर्चा कितना होता है। बता दें कि सदन की कार्यवाही में प्रति मिनट जनता के लाखों रूपये और प्रतिदिन करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं।

लोकसभा में पीठासीन जगदंबिका पाल ने विपक्ष के हंगामे पर नाराजगी जाहिर की। बता दें कि सदन चलाने में करीब डेढ़ करोड़ रुपये प्रति घंटा खर्च होता है और एक-एक मिनट का लगभग ढाई लाख रुपये। यानी एक दिन में करीब 9 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। ऐसे में गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार से सदन की कार्यवाही बाधित होना जनता के पैसे की बर्बादी है।
क्यों हो रहा हंगामा
2 / 5सवाल उठता है कि अगर चर्चा नहीं करनी है और स्पीकर को सदन में आने भी नहीं देना है, तो क्या इसे सिर्फ राजनीतिक एजेंडा बनाया जा रहा है? स्पीकर सदन के कस्टोडियन हैं। उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया है, जिसे स्वीकार किया गया है। प्रस्ताव रखने वाले सांसद को बोलने की अनुमति भी दी गई है, लेकिन अगर फिर भी सदन नहीं चलने दिया जाता, तो देश देख रहा है कि सरकार सदन चलाना चाहती है, जबकि विपक्ष बाधा उत्पन्न कर रहा है। यह गैर-जिम्मेदाराना और अपरिपक्व व्यवहार है।
प्रतिदिन करीब 6 से 9 करोड़ रुपये खर्च
3 / 5भारतीय संसद (लोकसभा और राज्यसभा) को चलाने में प्रतिदिन लगभग ₹6 करोड़ से ₹9 करोड़ का खर्च आता है। यह खर्चीली प्रक्रिया है, जिसमें प्रति मिनट लगभग ₹2.5 लाख से ₹2.6 लाख और प्रति घंटे लगभग ₹1.5 करोड़ तक खर्च होते हैं। यह धनराशि टैक्सपेयर्स की है, जो सदन स्थगित होने या हंगामे के कारण बर्बाद होती है।
लोक सभा और राज्य सभा में कितना
4 / 5प्रति मिनट खर्च: लगभग ₹2.5 लाख प्रति घंटा खर्च: लगभग ₹1.5 करोड़ प्रतिदिन खर्च: ₹6 से ₹9 करोड़ (अनुमानित) लोकसभा बनाम राज्यसभा: लोकसभा (प्रति घंटा ~₹1.5 करोड़) की तुलना में राज्यसभा का खर्च कम है (प्रति घंटा ~₹75 लाख)।
किन चीजों पर होता है खर्च
5 / 5सांसदों का वेतन, भत्ते और सुविधाएं सदन की सुरक्षा और सचिवालय कर्मचारियों की सैलरी लाइव टेलीकास्ट, एयर कंडीशनिंग और अन्य परिचालन खर्चे यह खर्चा तब भी जारी रहता है जब सदन में हंगामा होता है या कार्यवाही स्थगित होती है, जो जनता के पैसे की बर्बादी है।