
1 / 6
पुराने समय में बिजली कटते ही गांव और छोटे शहरों के आसमान में चमकते सितारों की एक जादुई दुनिया दिखने लगती थी. लेकिन आज बढ़ते प्रदूषण और चकाचौंध वाली लाइटों के कारण शहरों से तारे पूरी तरह गायब हो चुके हैं जिससे हमारी नई पीढ़ी इस कुदरती नजारे से महरूम हो रही है.
बोर्टल स्केल क्या है और इसमें दिल्ली-मुंबई का स्कोर कितना खराब है?

2 / 6
आसमान के अंधेरे और सितारों की चमक को मापने के लिए बोर्टल स्केल का इस्तेमाल किया जाता है जिसमें 1 का मतलब गहरा अंधेरा और 9 का मतलब सबसे खराब स्थिति है. लद्दाख के हैनले का स्कोर जहां शानदार 1 है वहीं दिल्ली 9 और मुंबई 8 के स्कोर के साथ सितारों के मामले में बेहद गरीब हो चुके हैं.
क्या वाकई आकाशगंगा की रोशनी से जमीन पर परछाई बन सकती है?

3 / 6
लद्दाख के हैनले में स्थित भारतीय वेधशाला दुनिया की उन गिनी-चुनी जगहों में से है जहां आसमान इतना साफ है कि आकाशगंगा की रोशनी जमीन पर परछाई बना देती है. 90 के दशक तक मुंबई के बाहरी इलाकों में भी दूधिया रोशनी की नदी जैसा यह नजारा दिखता था जो अब सिर्फ यादों में ही सिमट कर रह गया है.
हमारी स्ट्रीट लाइटें कैसे सितारों की सबसे बड़ी दुश्मन बन रही हैं?

4 / 6
भारत में ज्यादातर स्ट्रीट लाइटों का डिजाइन ऐसा है कि उनकी रोशनी सीधे ऊपर आसमान की ओर जाकर वातावरण में एक नारंगी धुंध पैदा कर देती है. अगर इन लाइटों पर सिर्फ एक शेड लगा दिया जाए और उनका रुख नीचे जमीन की तरफ कर दिया जाए तो आसमान को इस रोशनी के शोर से बचाया जा सकता है.
पेंच टाइगर रिजर्व में लाइटें बंद करने से क्या बदलाव आया है?

5 / 6
महाराष्ट्र का पेंच टाइगर रिजर्व भारत का पहला डार्क स्काई पार्क बना है जहां रात को फालतू लाइटें बंद करने से जंगल के जानवरों को बहुत सुकून मिला है. इससे निशाचर जानवरों और प्रवासी पक्षियों की बायोलॉजिकल क्लॉक में सुधार हो रहा है और वहां से आज भी सितारों का संसार साफ देखा जा सकता है.
इस गंभीर समस्या का सबसे आसान और टिकाऊ समाधान क्या है?

6 / 6
हैनले और पेंच जैसे रिजर्व एक अच्छी उम्मीद हैं लेकिन जब तक प्रकाश प्रदूषण को रोकने के लिए कोई राष्ट्रीय नीति या कानून नहीं बनता तब तक हालात नहीं सुधरेंगे. हमें विकास और अंधेरे के बीच संतुलन बनाना होगा ताकि आने वाली पीढ़ियां सितारों और मिल्की वे को सिर्फ किताबों में ही न देखें बल्कि असल में भी महसूस कर सकें.