भारत के आसमान से क्यों गायब हो रहे सितारे? वैज्ञानिक भी हैरान
क्या आपने गौर किया है कि रात के आसमान से सितारे धीरे-धीरे गायब क्यों हो रहे हैं? टिमटिमाते तारों को आखिर कौन निगल रहा है? इसके जवाब ने वैज्ञानिकों को भी चिंता में डाल दिया है.

पुराने समय में बिजली कटते ही गांव और छोटे शहरों के आसमान में चमकते सितारों की एक जादुई दुनिया दिखने लगती थी. लेकिन आज बढ़ते प्रदूषण और चकाचौंध वाली लाइटों के कारण शहरों से तारे पूरी तरह गायब हो चुके हैं जिससे हमारी नई पीढ़ी इस कुदरती नजारे से महरूम हो रही है.
बोर्टल स्केल क्या है और इसमें दिल्ली-मुंबई का स्कोर कितना खराब है?
2 / 6आसमान के अंधेरे और सितारों की चमक को मापने के लिए बोर्टल स्केल का इस्तेमाल किया जाता है जिसमें 1 का मतलब गहरा अंधेरा और 9 का मतलब सबसे खराब स्थिति है. लद्दाख के हैनले का स्कोर जहां शानदार 1 है वहीं दिल्ली 9 और मुंबई 8 के स्कोर के साथ सितारों के मामले में बेहद गरीब हो चुके हैं.
क्या वाकई आकाशगंगा की रोशनी से जमीन पर परछाई बन सकती है?
3 / 6लद्दाख के हैनले में स्थित भारतीय वेधशाला दुनिया की उन गिनी-चुनी जगहों में से है जहां आसमान इतना साफ है कि आकाशगंगा की रोशनी जमीन पर परछाई बना देती है. 90 के दशक तक मुंबई के बाहरी इलाकों में भी दूधिया रोशनी की नदी जैसा यह नजारा दिखता था जो अब सिर्फ यादों में ही सिमट कर रह गया है.
हमारी स्ट्रीट लाइटें कैसे सितारों की सबसे बड़ी दुश्मन बन रही हैं?
4 / 6भारत में ज्यादातर स्ट्रीट लाइटों का डिजाइन ऐसा है कि उनकी रोशनी सीधे ऊपर आसमान की ओर जाकर वातावरण में एक नारंगी धुंध पैदा कर देती है. अगर इन लाइटों पर सिर्फ एक शेड लगा दिया जाए और उनका रुख नीचे जमीन की तरफ कर दिया जाए तो आसमान को इस रोशनी के शोर से बचाया जा सकता है.
पेंच टाइगर रिजर्व में लाइटें बंद करने से क्या बदलाव आया है?
5 / 6महाराष्ट्र का पेंच टाइगर रिजर्व भारत का पहला डार्क स्काई पार्क बना है जहां रात को फालतू लाइटें बंद करने से जंगल के जानवरों को बहुत सुकून मिला है. इससे निशाचर जानवरों और प्रवासी पक्षियों की बायोलॉजिकल क्लॉक में सुधार हो रहा है और वहां से आज भी सितारों का संसार साफ देखा जा सकता है.
इस गंभीर समस्या का सबसे आसान और टिकाऊ समाधान क्या है?
6 / 6हैनले और पेंच जैसे रिजर्व एक अच्छी उम्मीद हैं लेकिन जब तक प्रकाश प्रदूषण को रोकने के लिए कोई राष्ट्रीय नीति या कानून नहीं बनता तब तक हालात नहीं सुधरेंगे. हमें विकास और अंधेरे के बीच संतुलन बनाना होगा ताकि आने वाली पीढ़ियां सितारों और मिल्की वे को सिर्फ किताबों में ही न देखें बल्कि असल में भी महसूस कर सकें.



















