सांसद होकर भी नहीं लेते सैलरी! बीजेपी और कांग्रेस के ये 2 लोकसभा सांसद छोड़ देते हैं पूरा वेतन और सुविधाएं

भारत में लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों को हर महीने वेतन और कई तरह की सुविधाएं मिलती हैं. फिलहाल सांसदों की बेसिक सैलरी करीब 1 लाख रुपये प्रति महीना है. इसके अलावा उन्हें क्षेत्र भत्ता, कार्यालय खर्च, यात्रा सुविधा और आवास जैसी कई सुविधाएं भी मिलती हैं. लेकिन देश में कुछ ऐसे नेता भी हैं जो सांसद बनने के बाद भी सरकार से मिलने वाली सैलरी नहीं लेते. खास बात ये है कि इनमें एक सांसद बीजेपी से और एक कांग्रेस से जुड़े हैं. दोनों नेताओं का कहना है कि राजनीति उनके लिए कमाई का साधन नहीं बल्कि जनता की सेवा का माध्यम है. आइए जानते हैं इन नेताओं के बारे में.

Parliament of India
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सांसदों को कितना वेतन और भत्ता मिलता है?

सांसदों को कितना वेतन और भत्ता मिलता है?2 / 7

भारत में लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों को हर महीने लगभग 1 लाख रुपये बेसिक सैलरी मिलती है. इसके अलावा उन्हें 70 हजार रुपये क्षेत्र भत्ता और 60 हजार रुपये कार्यालय खर्च भत्ता भी मिलता है. साथ ही सांसदों को सरकारी आवास, मुफ्त यात्रा और बाकी कई सुविधाएं भी दी जाती हैं. कुल मिलाकर सांसदों को मिलने वाली सुविधाओं की कीमत काफी ज्यादा होती है.

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सांसद सैलरी लेने से क्यों करते हैं इनकार

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कुछ सांसदों का मानना है कि राजनीति में आने का मकसद सिर्फ जनसेवा होना चाहिए. इसलिए वे सरकार से मिलने वाली सैलरी लेने से इनकार कर देते हैं. ऐसे नेताओं का कहना है कि वो पहले से आर्थिक रूप से सक्षम हैं और अपनी निजी आय से जीवनयापन कर सकते हैं.

बीजेपी के सांसद जो नहीं लेते सैलरी

बीजेपी के सांसद जो नहीं लेते सैलरी4 / 7

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक हरियाणा के कुरुक्षेत्र से बीजेपी सांसद नवीन जिंदल ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि वो सांसद के रूप में मिलने वाली सैलरी नहीं लेते. उनका कहना है कि राजनीति उनके लिए सेवा का माध्यम है और वो सरकारी वेतन के बिना भी काम कर सकते हैं. उनका ये फैसला अक्सर चर्चा का विषय बन जाता है.

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कांग्रेस के सांसद भी छोड़ चुके हैं वेतन

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सिर्फ बीजेपी ही नहीं, बल्कि कांग्रेस के एक लोकसभा सांसद भी ऐसे हैं जो सांसद के रूप में मिलने वाली सैलरी नहीं लेते. बिमोल अकॉइजम अंगोमचा इनर मणिपुर से कांग्रेस सांसद हैं. उनका कहना है कि जनता ने उन्हें देश की सेवा के लिए चुना है और वेतन लेना जरूरी नहीं है.

दोनों का फाइनेंशियल बैकग्राउंड बिल्कुल अलग

दोनों का फाइनेंशियल बैकग्राउंड बिल्कुल अलग6 / 7

दोनों सांसदों के चुनावी हलफनामों के मुताबिक, इनका फाइनेंशियल बैकग्राउंड बिल्कुल अलग है. कुरुक्षेत्र के सांसद नवीन जिंदल ने 1,241 करोड़ रुपए की संपत्ति का ऐलान किया है, जबकि कांग्रेस सांसद डॉ. बिमोल अकॉइजम अंगोमच ने लगभग 97 लाख रुपए की संपत्ति की घोषणा की है.

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देश में कम ही देखने को मिलते हैं ऐसे उदाहरण

देश में कम ही देखने को मिलते हैं ऐसे उदाहरण7 / 7

भारतीय राजनीति में सांसदों का सैलरी छोड़ना बहुत कम देखने को मिलता है. आम तौर पर सांसद वेतन और भत्ते लेते हैं, क्योंकि ये सरकारी व्यवस्था का हिस्सा है. लेकिन कुछ नेता अपनी व्यक्तिगत सोच और सिद्धांतों के चलते ऐसा फैसला लेते हैं. (All Photos Credit: Social Media)

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लेखक के बारे में

Varsha Sikri

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वर्षा सिकरी News24 हिंदी डिजिटल में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. जर्नलिज्म में 9 साल का अनुभव रखने वाली वर्षा सिकरी राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. वर्षा सिकरी ने सितंबर 2017 में इंडिया टीवी से अपने करियर की शुरुआत की थी, जिसके बाद से उन्होंने रिपब्लिक टीवी, जी न्यूज, आज तक जैसे चैनलों में काम किया. फिलहाल वो News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 9 साल के करियर में वर्षा सिकरी ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. वर्षा सिकरी का पत्रकारिता में अनुभव: 9 साल योग्यता: NRAI स्कूल ऑफ मास कम्यूनिकेशन से ग्रेजुएशन करने के बाद वर्षा सिकरी ने मीडिया में अपने करियर की शुरुआत की. उन्होंने बतौर एंकर और रिपोर्टर भी काम किया है.
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