वैश्विक स्तर पर देशों के बीच लगाता अविश्वास का माहौल बढ़ रहा है. जियो-पॉलिटिकल टेंशन और महाशक्तियां लगातार अपने परमाणु जखीरे को बढ़ाने में लगी हैं. इस बीच परमाणु हथियारों को लेकर एक रिपोर्ट सामने आई है जो बेहद चौंकाने वाली है.
SIPRI ने जारी की सालाना 'सिपरी ईयरबुक 2026'

2 / 7
रक्षा क्षेत्र पर नजर रखने वाली प्रतिष्ठित वैश्विक संस्था 'स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट' (SIPRI) ने अपनी सालाना 'सिपरी ईयरबुक 2026' जारी कर दी है. परमाणु हथियारों की संख्या और उनके प्रभाव को कम करने के लिए दशकों से किए जा रहे अंतरराष्ट्रीय प्रयास अब पूरी तरह से उल्टे होते दिख रहे हैं.
दुनिया के देश बढ़ा रहे अपने-अपने परमाणु हथियार

3 / 7
इस रिपोर्ट में ये बात सामने आई है कि दुनिया के कई देश अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बार फिर से परमाणु हथियारों पर अपनी निर्भरता को बढ़ा रहे हैं. कई देश अपने परमाणु हथियारों को मौजूदा समय की मांग के अनुसार और ज्यादा मॉर्डन बना रहे हैं.
रिपोर्ट में और क्या-क्या है?

4 / 7
इस रिपोर्ट में सबसे खास बात जो सामने आई है वो यह है कि दक्षिण एशिया में रणनीतिक संतुलन के लिहाज से भारत ने एक नया मुकाम हासिल कर लिया है. भारत का परमाणु हथियार भंडार साल 2025 के 180 वॉरहेड्स से बढ़कर साल 2026 में 190 वॉरहेड्स तक पहुंच चुका है.
भारत निकला पाकिस्तान से आगे

5 / 7
भारत के परमाणु हथियार भंडार में हुई इस बढ़ोतरी के साथ ही भारत रणनीतिक रूप से अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान से काफी आगे निकल गया है, जिसकी परमाणु क्षमता इस दौरान बिना किसी बदलाव के 170 वॉरहेड्स पर ही रुकी हुई है. सिपरी की यह रिपोर्ट दिखाती है कि भारत तेजी से और बहुत ही परिपक्वता के साथ अपनी रणनीतिक क्षमताओं का विस्तार कर रहा है.
भारत की ऊंची छंलाग

6 / 7
भारत और पाकिस्तान दोनों ही अपने परमाणु बलों और मिसाइल डिलीवरी सिस्टम को लगातार आधुनिक बना रहे हैं, लेकिन संख्या बल के मामले में भारत अब स्पष्ट बढ़त बना चुका है. जहां भारत के पास अब 190 परमाणु हथियार हैं. वहीं पाकिस्तान के पास केवल 170 वॉरहेड्स हैं. रिपोर्ट में भारत को लेकर एक बहुत ही महत्वपूर्ण और ऑपरेशनल शिफ्ट का जिक्र किया गया है.
फिर से बढ़ सकती है संख्या

7 / 7
वहीं अगर हम पूरी दुनिया के स्तर पर देखें तो सिपरी का अनुमान है कि जनवरी 2026 तक दुनिया का कुल परमाणु भंडार 12187 वॉरहेड्स था. अगर इसकी तुलना एक साल पहले यानी 2025 से की जाए, तो तब यह संख्या 12241 थी. कुल संख्या में मामूली गिरावट जरूर दर्ज की गई है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट भ्रामक हो सकती है. देश अपने पुराने और सेवामुक्त हो चुके परमाणु हथियारों को नष्ट करने की प्रक्रिया को धीमा कर रहे हैं. नए, अधिक घातक परमाणु प्रणालियों की तैनाती को तेज कर रहे हैं, जिससे आने वाले समय में यह ट्रेंड पूरी तरह पलट सकता है और कुल संख्या फिर से बढ़ सकती है.