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राघव चड्ढा के BJP में जाने की अटकलों से 'आप' की संसद में आवाज कमजोर हो सकती है, लेकिन उनके द्वारा उठाए गए ये जमीनी मुद्दे आज भी आम जनता के बीच उनकी पहचान बने हुए हैं. जानें, राघव चड्ढा की ओर से संसद में उठाए उनके 3 'आम' मुद्दे
मोबाइल रिचार्ज की '28 दिनों वाली लूट

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राघव चड्ढा ने राज्यसभा में टेलीकॉम कंपनियों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए इसे 'प्रीपेड रिचार्ज लूट' करार दिया. उन्होंने तर्क दिया कि एक साल में 12 महीने होते हैं, लेकिन कंपनियां 28 दिन का प्लान देकर ग्राहकों से साल में 13 बार रिचार्ज करवाती हैं. उन्होंने मांग की कि रिचार्ज प्लान पूरे 30 या 31 दिन का होना चाहिए. साथ ही, इनकमिंग कॉल्स कम से कम एक साल तक मुफ्त रहनी चाहिए ताकि गरीब आदमी का संपर्क न टूटे.
एयरपोर्ट पर 'महंगा समोसा और चाय'

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संसद में चर्चा के दौरान राघव ने एयरपोर्ट्स पर मिलने वाले खाने-पीने के सामान की आसमान छूती कीमतों का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि एक आम आदमी के लिए एयरपोर्ट पर समोसा और चाय खरीदना लग्जरी बन गया है. उन्होंने सरकार से सवाल किया कि क्या एयरपोर्ट कैंटीन में आम आदमी के बजट के हिसाब से किफायती खाने की व्यवस्था नहीं की जा सकती? हालांकि, इस मुद्दे पर उनकी अपनी ही पार्टी के कुछ नेताओं ने उन पर 'हल्के मुद्दे' उठाने का आरोप भी लगाया.
'10 मिनट डिलीवरी' और डिलीवरी बॉय का शोषण

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क्विक कॉमर्स (जैसे Blinkit, Zepto, Zomato) के दौर में राघव चड्ढा ने डिलीवरी बॉय की सुरक्षा का मुद्दा पूरी मजबूती से रखा. उन्होंने '10 मिनट डिलीवरी' सर्विस को 'क्रूरता' बताया. उन्होंने कहा कि 10 मिनट में खाना पहुंचाने के दबाव में ये युवा ट्रैफिक नियम तोड़ते हैं और अपनी जान जोखिम में डालते हैं. कस्टमर की एक खराब रेटिंग उनके पूरे महीने की कमाई खराब कर देती है. उन्होंने इन वर्कर्स के लिए बीमा और सुरक्षित कामकाजी माहौल की मांग की.