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नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट 1334 हेक्टेयर एरिया में बना है, जिसे भविष्य में 5100 हेक्टेयर तक विस्तृत करने की योजना है। वहीं इस एयरपोर्ट के शुरू होने से दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हवाई यात्रियों और उड़ानों का दबाव कम होगा। साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत हरियाणा और राजस्थान के करोड़ों लोगों को सीधा लाभ भी मिलेगा।
3900 मीटर लंबा 45 मीटर चौड़ा रनवे

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जेवर एयरपोर्ट पर अभी एक ही रनवे है, जो 3900 मीटर लंबा और 45 मीटर चौड़ा है। इस पर बड़े और भारी विमान आसानी से लैंड कर सकेंगे और टेकऑफ कर सकेंगे। भविष्य में इस एयरपोर्ट पर 6 रनवे बनाए जाने की योजना है।
जेवर एयरपोर्ट पर इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम

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जेवर एयरपोर्ट की एक खासियत इसकी हाईटेक टेक्नोलॉजी है। यहां मॉडर्न इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) लगा है, जिसके जरिए घने कोहरे, भारी बारिश या खराब मौसम में भी इस एयरपोर्ट पर लैंडिंग संभव होगी। 50 मीटर विजिबिलिटी में भी फ्लाइट उड़ेगी और लैंड होगी। इससे फ्लाइट के लेट और कैंसिल होने की समस्या खत्म होगी।
नोएडा एयरपोर्ट कार्गो और लॉजिस्टिक हब

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नोएडा के जेवर एयरपोर्ट को ग्लोबल कार्गो एंड लॉजिस्टिक हब के रूप में भी विकसित करने की तैयारी है। यहां सालाना 2.5 मिलियन टन कार्गो व्यवस्थित किया जा सकेगा। विमानों के रखरखाव के लिए MRO सुविधाएं मिलेंगी। नॉर्थ इंडिया के लिए लॉजिस्टिक हब होने के कारण कई राज्यों के लिए व्यापार और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
जेवर एयरपोर्ट की अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था

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नोएडा के एयरपोर्ट की सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को सौंपी गई है। करीब 1047 जवान पहले चरण में तैनात किए जाएंगे। CISF के अलावा एयरक्राफ्ट रेस्क्यू एंड फायरफाइटिंग (ARFF) कैटेगरी की सुविधा भी मिलेगी।
नोएडा एयरपोर्ट से 11 शहरों के लिए फ्लाइट

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नोएडा के जेवर एयरपोर्ट से पहले चरण में इंडिगो, आकासा और एयर इंडिया एक्सप्रेस समेत कई एयरलाइंस उड़ानें शुरू करेंगी। वाराणसी, लखनऊ, अहमदाबाद, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, जयपुर, चेन्नई, पटना, कानपुर और श्रीनगर शहरों के लिए सीधी फ्लाइट्स शुरू होंगी। रोजाना करीब 150 उड़ानों का संचालन होगा।
ग्रीन एयरपोर्ट और कनेक्टिविटी का मॉडल

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नोएडा का जेवर एयरपोर्ट दिल्ली के IGI एयरपोर्ट से 72 किलोमीटर, नोएडा से 52 किलोमीटर और आगरा से 130 किलोमीटर की दूरी पर है। यमुना एक्सप्रेसवे के जरिए एयरपोर्ट तक पहुंचाना आसान है। भविष्य में एयरपोर्ट को मेट्रो और ट्रेन कनेक्टिविटी से जोड़ा जाएगा। ग्रीन एयरपोर्ट बनाने के लिए यहां सोलर एनर्जी, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और पेड़-पौधे लगाने की तैयारी है।