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लिपुलेख पास को लेकर भारत और नेपाल के बीच विवाद फिर तेज हो गया है. कैलाश मानसरोवर यात्रा और भारत-चीन समझौते के बाद नेपाल ने आपत्ति जताई है. क्या है इस विवाद का इतिहास, वजह और मौजूदा स्थिति.
लिपुलेख पास क्या है?

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लिपुलेख पास हिमालय पर मौजूद एक रास्ता है, जो भारत (उत्तराखंड), नेपाल और चीन (तिब्बत) के पास स्थित है. ये पास समुद्र तल से करीब 17,000 फीट की ऊंचाई पर है और पुराने वक्त से व्यापार और तीर्थ यात्रा का महत्वपूर्ण रास्ता रहा है.
कैलाश मानसरोवर यात्रा से क्या है कनेक्शन?

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ये पास खासतौर पर कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए अहम माना जाता है. भारत से जाने वाले श्रद्धालु इसी रास्ते से तिब्बत में मौजूद कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील तक पहुंचते हैं.
विवाद की जड़ क्या है?

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भारत और नेपाल के बीच विवाद की अहम वजह कालापानी-लिपुलेख-लिम्पियाधुरा इलाका है. नेपाल का दावा है कि 1816 की सुगौली संधि के मुताबिक ये इलाका उसका है, जबकि भारत इस दावे को ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर खारिज करता है.
भारत का क्या कहना है?

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भारत का कहना है कि लिपुलेख पास उसके नियंत्रण में लंबे समय से है और ये ऐतिहासिक तौर पर भारत का हिस्सा रहा है. भारत ये भी कहता है कि कैलाश मानसरोवर यात्रा का ये रास्ता सालों से इस्तेमाल होता आ रहा है और इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है.
नेपाल को आपत्ति क्यों?

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नेपाल ने हाल ही में भारत और चीन के बीच लिपुलेख के जरिए यात्रा और व्यापार शुरू करने पर आपत्ति जताई है. नेपाल का कहना है कि ये उसकी संप्रभुता का उल्लंघन है और इस पर पहले बातचीत होनी चाहिए.
2020 के बाद विवाद क्यों बढ़ा?

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2020 में भारत के लिपुलेख तक सड़क निर्माण के बाद नेपाल ने कड़ा विरोध जताया था. इसके बाद नेपाल ने नया नक्शा जारी कर इस इलाके को अपना हिस्सा बताया, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ गया. 2026 में एक बार फिर ये विवाद चर्चा में है. नेपाल ने भारत से बातचीत की मांग की है, जबकि भारत अपने रुख पर कायम है.
(All Photos Credit: Social Media)