मंगेतर केतन की 'कातिल' सिया के हाथ खुले क्यों? हथकड़ी को लेकर देश में क्या है प्रोटोकॉल, 7 पॉइंट में जानें नियम

आजकल देश में केतन अग्रवाल मर्डर केस सुर्खियों में हैं। केतन के हत्यारोपी उसकी मंगेतर सिया गोयल और उसका ब्वॉयफ्रेंड चेतन चौधरी पर पूरे देश की नजर है। इस बीच दोनों को लेकरएक सवाल उठ रहा है कि आखिर सिया को पुलिस ने हथकड़ी क्यों नहीं पहनाई, चेतन आनंद को क्यों पहनाई गई? क्या हथकड़ी को लेकर नियम हैं या कोई और बात है?

police handcuffs rules
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सोशल मीडिया पर सिया गोयल और चेतन आनंद का वीडियो वायरल हुआ। सिया को लेकर पहले महिला पुलिस थाने से निकलती है, लेकिन सिया के हाथों में हथकड़ी नहीं हैं। वही जब पुलिस चेतन को लेकर निकली तो उसके हाथों में हथकड़ी लगी थी। क्योंकि देश मे हथकड़ी को लेकर कुछ नियम तय हैं और कोर्ट भी हथकड़ी पहनाने पर आपत्ति जताती रही हैं।

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ठोस कारण होने पर हथकड़ी पहना सकते

ठोस कारण होने पर हथकड़ी पहना सकते2 / 7

दरअसल, पुलिस हिरासत में महिलाओं को हथकड़ी पहनाने से पुलिस बचती है। कोर्ट भी बिना किसी ठोस वजह के हथकड़ी न पहनाने की सलाह पुलिस को देती है। नियमों के अनुसार, सिर्फ एस्कॉर्ट के लिए पुरुष और महिलाओं दोनों आरोपियों को हथकड़ी नहीं पहनाई जा सकती। वहीं 21 साल तक के अपराधियों के कोर्ट की परमिशन के बिना हथकड़ी नहीं पहना सकते।

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फरार होने की आंशका तो हथकड़ी लगाओ

फरार होने की आंशका तो हथकड़ी लगाओ3 / 7

नियम के अनुसार, अगर गिरफ्तार किए गए अपराधी के फरार होने की आशंका हो तो पुलिस उसे हथकड़ी लगा सकती है। हथकड़ी लगाने के कई मामले कोर्ट पहुंचे हैं, जिन पर तीखी बहस भी हुई। मामलों में कोर्ट के द्वारा हथकड़ी को लेकर फैसले भी सुनाए गए हैं। कोर्ट का कहना है कि जब तक हथकड़ी लगाने का कोई ठोस वजह न हो, हथकड़ी न लगाओ।

पुलिस की परमिशन से ही हथकड़ी लगेगी

पुलिस की परमिशन से ही हथकड़ी लगेगी4 / 7

प्रोटोकॉल के अनुसार, गंभीर अपराध के मामलों में आरोपियों को अदालत, अस्पताल और अन्य स्थानों पर ले जाते समय हथकड़ी लगाई जा सकती है। दिल्ली पुलिस के नियमों के अनुसार, 18 से 21 साल तक के युवाओं को कोर्ट की अनुमति के बिना हथकड़ी नहीं लगाई जा सकती। पुलिस रिमांड के दौरान अपराधी को हथकड़ी लगाने के लिए पुलिस को अदालत से लिखित अनुमति लेनी होगी।

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BNS की धारा में हथकड़ी लगाने के नियम

BNS की धारा में हथकड़ी लगाने के नियम5 / 7

BNS की धारा 43(3) के तहत, संगठित अपराध, आतंकवाद, नशीले पदार्थों से संबंधित अपराध, हथियारों और गोला-बारूद के अवैध कब्जे, हत्या, बलात्कार, एसिड अटैक, करेंसी या सिक्कों की जालसाजी, मानव तस्करी, बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों या राज्य के विरुद्ध अपराधों के आरोपियों को गिरफ्तार करते समय या कोर्ट में पेश करते समय हथकड़ी लगा सकते हैं।

बेड़ियां कोर्ट की परमिशन से पहनाई जाएंगी

बेड़ियां कोर्ट की परमिशन से पहनाई जाएंगी6 / 7

नियम के अनुसार, अगर किसी अपराधी को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ रहा है तो उसे हथकड़ी नहीं लगाई जाएगी। बेड़ियों भी सिर्फ कोर्ट की अुनमति से ही पहनाई जा सकती हैं। महिला आरोपियों की रेगुलर हथकड़ी नहीं लगाई जा सकती। महिलाओं को हथकड़ी असाधारण परिस्थितियों में ही लगाई जाएगी। किसी अपराधी के फरार होने की संभावना है या पुराना रिकॉर्ड खराब है तो हथकड़ी लगा सकते हैं।

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सफर में हथकड़ी चेन के साथ लगानी होगी

सफर में हथकड़ी चेन के साथ लगानी होगी7 / 7

गैंगस्टर को कमर के पीछे हाथ करके हथकड़ी लगाई जा सकती है। ट्रैवलिंग के दौरान हथकड़ी के साथ चेन का इस्तेमाल किया जा सकता है। खाना खाते समय या टॉयलेट जाने के लिए हथकड़ी हटाई जा सकती है। कुल मिलाकर पुलिस को अपराधियों को हथकड़ी पहनाने के लिए नियमों का पालन करना होता है। वहीं कुछ मामलों में हथकड़ी लगाने के लिए कोर्ट की अनुमति जरूरी होती है।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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