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इसरो के वैज्ञानिकों ने चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास मॉन्स माउटन क्षेत्र में 'एमएम-4' नामक खास जगह पहचानी है. यह वही इलाका है जहां भारत का चंद्रयान-4 मिशन उतरकर इतिहास रचने की तैयारी कर रहा है.
क्यों है यह जगह खास?

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मॉन्स माउटन एक ऊंचा पर्वतीय क्षेत्र है जहां भारी मात्रा में जल-बर्फ मिलने की प्रबल संभावना जताई गई है. यह बर्फ भविष्य में अंतरिक्ष यात्रियों के लिए पीने का पानी और रॉकेट ईंधन बनाने के काम आ सकती है.
मिट्टी लेकर लौटेगा भारत

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चंद्रयान-4 भारत का पहला ऐसा मिशन होगा जो चांद की मिट्टी और चट्टानों के नमूने इकट्ठा करके वापस धरती पर लाएगा. इसमें पांच विशेष हिस्से एक साथ काम करेंगे ताकि नमूनों को सुरक्षित प्रयोगशाला तक पहुंचाया जा सके.
चुनौतियों भरी लैंडिंग

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दक्षिणी ध्रुव का यह इलाका बेहद उबड़-खाबड़ और गड्ढों से भरा है जिसे पार करना किसी बाधा दौड़ जैसा है. इसरो ने चंद्रयान-2 के हाई-क्वालिटी कैमरों की मदद से इस समतल और सुरक्षित लैंडिंग साइट को चुना है.
दुनिया की टिकी नजरें

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चांद के संसाधनों को देखते हुए चीन और अमरीका जैसे देश भी इस क्षेत्र में अपने मिशन भेजने की होड़ में लगे हैं. भारत अगर यहां सफल लैंडिंग करता है, तो वह चांद पर अपना बेस बनाने की दिशा में बहुत आगे निकल जाएगा.
भविष्य का नया द्वार

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यह मिशन न केवल वैज्ञानिक खोजों के नए रास्ते खोलेगा बल्कि पूरी दुनिया को अंतरिक्ष विज्ञान में भारत की बढ़ती ताकत का एहसास कराएगा. 2028 तक पूरा होने वाला यह मिशन हर भारतीय के लिए गर्व का विषय बनने वाला है.