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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राजनीतिक पटल पर एक नया इतिहास रच दिया है. भवानीपुर से ममता बनर्जी की हार ने हर किसी को चौंका दिया है. चुनावी नतीजों के बाद अब बंगाल में मकान नंबर 77 की काफी चर्चा हो रही है. ऐसा माना जा रहा है कि ममता बनर्जी को इसी मकान का 'श्राप' लगा है. आइए जानते हैं क्या है इस घर की कहानी?
भाजपा की ऐतिहासिक जीत

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पश्चिम बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत ने भवानीपुर के मकान नंबर 77 को फिर से सुर्खियों में ला दिया है. डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का यह पुराना निवास स्थान आज राष्ट्रवाद का प्रतीक बन चुका है. ममता बनर्जी की हार के बाद लोग इसे उनके राजनीतिक सफर पर 'श्राप' जैसा करार दे रहे हैं.
मकान नंबर 77 का इतिहास

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आशुतोष मुखर्जी रोड पर स्थित यह 105 वर्ष पुराना मकान डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का निवास था. यहां उन्होंने अखंड भारत और पश्चिम बंगाल को बचाने की रणनीतियां तैयार कीं. दशकों तक सरकारी उपेक्षा का शिकार यह भवन अब भाजपा की जीत के बाद गौरव का केंद्र बन गया है.
श्यामा प्रसाद मुखर्जी की विरासत

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डॉ. मुखर्जी ने 1921 से सक्रिय राजनीतिक जीवन शुरू किया और बंगाल विभाजन के खिलाफ संघर्ष किया. उनकी विचारधारा ने भाजपा को चुनावी अभियान में मजबूत आधार दिया. 206 सीटों वाली जीत इसी वैचारिक पुनरागमन का परिणाम है.
ममता बनर्जी का भवानीपुर कनेक्शन

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ममता बनर्जी का घर इसी इलाके में है, लेकिन उन्होंने मुखर्जी की विचारधारा को हमेशा 'बाहरी' करार दिया. उनकी सल्तनत को इसी वैचारिक खाई ने कमजोर किया. टीएमसी की 81 सीटों वाली हार इसका जीता-जागता प्रमाण है.
चुनावी नतीजों का राजनीतिक असर

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भाजपा को 206 सीटें मिलना बंगाल के इतिहास में विरल उपलब्धि है. टीएमसी का सिंडिकेट राज और अहंकार इस हार का मुख्य कारण रहा. मकान नंबर 77 से प्रेरित राष्ट्रवाद ने जनता का दिल जीत लिया.
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया

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भवानीपुर के निवासियों का कहना है कि इस मकान की 'आत्मा' को आज शांति मिली है. पुरानी दीवारें और चौखटें जीत के उत्सव में शामिल हो गई हैं. मीडिया रिपोर्ट्स में बुजुर्गों की भावुक बातें छपी हैं.
भाजपा की रणनीतिक सफलता

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भाजपा ने मुखर्जी की विरासत को ग्राउंड लेवल पर जोड़ा, जिससे भावनात्मक समर्थन मिला. नबन्ना तक का सफर इसी घर से प्रेरित है. आने वाले दिनों में यह प्रेरणा केंद्र बनेगा.