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भारत में इथेनॉल को भविष्य के ईंधन के तौर पर तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है. क्या आप जानते हैं कि 1 टन गन्ने से करीब 70 से 85 लीटर तक इथेनॉल तैयार किया जा सकता है? जानिए इसकी पूरी प्रक्रिया, किसानों को होने वाले फायदे और सरकार का नया प्लान.
भारत में क्यों बढ़ रही है इथेनॉल की मांग?

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भारत सरकार पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा दे रही है ताकि कच्चे तेल पर निर्भरता कम की जा सके. इथेनॉल एक बायोफ्यूल है, जिसे गन्ना, मक्का और बाकी कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है. सरकार की E20 पॉलिसी के बाद इसकी मांग तेजी से बढ़ी है.
1 टन गन्ने से कितना इथेनॉल बनता है?

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सामान्य हालातों में 1 टन गन्ने से लगभग 70 से 85 लीटर तक इथेनॉल तैयार किया जा सकता है. हालांकि इसकी मात्रा गन्ने की क्वालिटी, शुगर की मात्रा और प्रोसेसिंग तकनीक पर निर्भर करती है.
कैसे तैयार होता है इथेनॉल?

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सबसे पहले गन्ने का रस निकाला जाता है. इसके बाद उसे प्रोसेस कर मोलासेस यानी शीरा बनाया जाता है. फिर फर्मेंटेशन और डिस्टिलेशन प्रक्रिया के जरिए इथेनॉल तैयार होता है. कई आधुनिक प्लांट अब सीधे गन्ने के रस से भी इथेनॉल बना रहे हैं.
किसानों को क्या फायदा मिलता है?

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इथेनॉल प्रोडक्शन बढ़ने से गन्ना किसानों की डिमांड बढ़ती है. इससे किसानों की इनकम बढ़ती है और चीनी मिलों को भी एक्सट्रा कमाई का स्रोत मिलता है. उद्योग संगठनों के मुताबिक, किसानों को लाखों करोड़ रुपये का भुगतान इथेनॉल नीति की वजह से संभव हुआ है.
भारत की ऊर्जा सुरक्षा में बड़ी भूमिका

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इथेनॉल ब्लेंडिंग से भारत को कच्चे तेल के आयात में कमी लाने में मदद मिल रही है. सरकार का मानना है कि इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और देश ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बन सकेगा.
E20 से E100 तक की तैयारी

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भारत में फिलहाल E20 यानी 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल लागू किया जा चुका है. अब सरकार E85 और E100 जैसे हाई इथेनॉल फ्यूल विकल्पों पर भी काम कर रही है.
(All Photos Credit: Social Media)