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देश के कई हिस्सों में पारा 43 डिग्री के पार पहुंच गया है जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है. सरकारी आंकड़े बताते हैं कि यह भीषण गर्मी केवल असुविधा नहीं बल्कि हर साल हजारों लोगों की मौत की वजह बन रही है.
एनसीआरबी के चौंकाने वाले आंकड़े

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एनसीआरबी के मुताबिक साल 2018 से 2022 के बीच लू की चपेट में आने से कुल 3,798 लोगों की दर्दनाक मौत हुई है. आंकड़ों से साफ है कि गर्मी का बढ़ता प्रकोप अब एक गंभीर स्वास्थ्य संकट का रूप ले चुका है जिससे बचना जरूरी है.
किन राज्यों में गर्मी ने सबसे ज्यादा तांडव मचाया?

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महाराष्ट्र और बिहार इस लिस्ट में सबसे ऊपर हैं जहां गर्मी ने सबसे ज्यादा लोगों को अपना शिकार बनाया है. अकेले महाराष्ट्र में पांच सालों में 470 मौतें हुई हैं जबकि बिहार में भी 467 लोगों ने लू के कारण दम तोड़ा है.
कैसे शरीर के लिए काल बन जाती है यह लू?

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अत्यधिक गर्मी शरीर के तापमान को कंट्रोल करने की कुदरती क्षमता को पूरी तरह से बिगाड़ कर रख देती है. भारी पसीने के कारण शरीर में पानी और नमक की कमी हो जाती है जिससे चक्कर आना और बेहोशी जैसे लक्षण दिखने लगते हैं.
शरीर के अंगों पर कैसा पड़ता है इसका बुरा असर?

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हीट स्ट्रोक के दौरान दिल और दिमाग पर भारी दबाव पड़ता है जिससे ब्लड प्रेशर अचानक बिगड़ सकता है. किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंग काम करना बंद कर सकते हैं जो समय पर इलाज न मिलने की स्थिति में मौत की वजह बनता है.
क्या भौगोलिक स्थिति तय करती है मौतों का आंकड़ा?

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उत्तर और मध्य भारत के राज्य हीटवेव के प्रति सबसे ज्यादा संवेदनशील पाए गए हैं जहां मौतों की संख्या सैकड़ों में है. इसके उलट पहाड़ी और उत्तर-पूर्वी राज्यों में गर्मी का असर कम होने की वजह से ऐसे मामले न के बराबर सामने आते हैं.