भारतीय लोकतंत्र की यात्रा बेहद रोमांच भरी रही रही है. इस यात्रा में हमने ऐसे दौर भी देखे जब राजनीतिक अस्थिरता के कारण कुछ प्रधानमंत्रियों की कुर्सी महज चंद दिनों में चली गई थी, तो वहीं कुछ नेताओं ने लंबे समय तक देश की कमान संभाली.
पीएम मोदी तोड़ेंगे नेहरू का रिकॉर्ड?

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वहीं, निर्वाचित प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी 10 जून को प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का 4,399 का रिकॉर्ड पीछे छोड़ देंगे. तो आज हम जानेंगे भारत के उन प्रधानमंत्रियों के बारे में जिनका कार्यकाल सबसे छोटा रहा और साथ ही उस ऐतिहासिक रिकॉर्ड के बारे में भी जो अब कुछ ही दिनों में बनने जा रहा है.
इन्हें नहीं मिला था 1 दिन का भी कार्यकाल

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कार्यवाहक प्रधानमंत्री गुलजारी लाल नंदा को सम्मिलित करने पर नरेंद्र मोदी देश के पंद्रहवें प्रधानमंत्री हैं. इस बीच कुछ प्रधानमंत्रियों को लंबे समय तक देश के सबसे महत्वपूर्ण पद पर कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ तो कुछ के कार्यकाल अति संक्षिप्त थे. इनमें चौधरी चरण सिंह अकेले थे, जिन्हें प्रधानमंत्री के रूप में संसद का एक दिन भी सामना करने का मौका नहीं मिला.
चुनाव से पहले मिला था नेहरू को पीएम पद

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15 अगस्त 1947 को देश की स्वतंत्रता के पूर्व 2 सितंबर 1946 से पंडित जवाहर लाल नेहरू अंतरिम सरकार की अगुवाई कर रहे थे. इस सरकार में वायसराय की कार्यकारी परिषद के उपाध्यक्ष के तौर पर नेहरू का पद प्रधानमंत्री के समकक्ष था. आजादी मिलने के बाद संविधान सभा को अंतरिम लोकसभा के रूप में स्वीकार किया गया और पंडित नेहरू का कार्यकाल आगे प्रधानमंत्री के रूप में जारी रहा.
नंदा को दो बार मिला मौका

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पंडित नेहरू के निधन के बाद 27 मई 1964 से 9 जून 1964 की 13 दिन की अवधि में कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में गुलजारी लाल नंदा ने कार्य किया. अगले प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने 9 जून को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. प्रधानमंत्री के रूप में उनके नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी को किसी चुनाव का सामना करने का अवसर नहीं मिला. लेकिन 1965 के पाकिस्तान युद्ध में भारत की जीत ने शास्त्री जी के कार्यकाल को यादगार बना दिया.
मिला था 13 दिन का कार्यकाल

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इस युद्ध के बाद पाकिस्तान के साथ समझौता वार्ता हुई. समझौते की रात 11 जनवरी 1966 को ताशकंद में शास्त्री जी का निधन हो गया. प्रधानमंत्री के रूप में उनका 581 दिन का कार्यकाल था. इसके बाद गुलजारी लाल नंदा ने एक बार फिर से कार्यवाहक प्रधानमंत्री की शपथ ली. दूसरी बार भी 11 जनवरी 1966 से 24 जनवरी 1966 के बीच उन्हें सिर्फ 13 दिन का कार्यकाल मिला.
अटल बिहारी वाजपेयी

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वहीं, बात करें भारतीय राजनीति के शिखर पुरुष कहे जाने वाले अटल बिहारी वाजपेयी की तो वे अपने पहले कार्यकाल में देश के इतिहास में सबसे छोटे पूर्णकालिक कार्यकाल वाले प्रधानमंत्री थे. बात साल 1996 के लोकसभा चुनावों की है जब भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी तब अटल जी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, लेकिन लोकसभा में बहुमत साबित न कर पाने के कारण उनकी सरकार मात्र 13 दिनों में ही गिर गई. हालांकि, बाद में उन्होंने वापसी की और अपना 5 साल का कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा किया.
इंदिरा गांधी को मिले थे तीन कार्यकाल

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प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को चार कार्यकाल प्राप्त हुए. लाल बहादुर शास्त्री के निधन के बाद कांग्रेस संसदीय पार्टी में नेता पद के चुनाव में मोरारजी देसाई को पराजित कर पहली बार 24 जनवरी 1966 को उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. 1967 के चौथे आम चुनाव और 1971 के मध्यावधि चुनाव में कांग्रेस की जीत के साथ 24 मार्च 1977 तक इंदिरा प्रधानमंत्री पद पर आसीन रहीं.
फिर शुरू हुई राजीव गांधी की पारी

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इंदिरा गांधी की दुखद हत्या के दिन 31 अक्टूबर 1984 को अगले प्रधानमंत्री के रूप में राजीव गांधी ने शपथ ली. समय से पूर्व 1984 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने जबरदस्त जीत दर्ज की. एक बार फिर राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. लेकिन 1989 के चुनाव में कांग्रेस की पराजय के साथ 2 दिसंबर 1989 को उनका इस्तीफा हो गया. प्रधानमंत्री पद पर राजीव गांधी 1,858 दिन रहे.