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किभी युद्ध या युद्धाभास में, कई प्रदर्शनी में आपने फाइटर जेट के बारे में तो सुना ही होगा। राफेल से लेकर सुखोई तक लड़ाकू विमान भारत की शान हैं। लेकिन क्या कभी आपने सोचा होगा कि इनका माइलेज क्या होता होगा। राफेल, F-22, Su-30 और तेजस जैसे जेट 1 लीटर में कितना सफर तय करते होंगे आइए विस्तार से जानते हैं।

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युद्ध के दौरान सबसे ज्यादा जरूरी होती है फाइटर जेट की रफ्तार। अब ऐसे में फाइटर जेट में खपत होने वाले फ्यूल की मात्रा कई गुना हो जाती है। बता दें कि फाइटर जेट का माइलेज किमी प्रति लीटर में नहीं मापा जाता है। इसका माइलेज मीटर प्रति लीटर में मापा जाता है। 1 लीटर फ्यूल में ये फाइटर जेट महज 200 से 400 मीटर तक ही उड़ पाते हैं।

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सिंपल फ्लाईंग के मुताबिक राफेल या F-16 जैसे मीडियम श्रेणी के जेट सामान्य गति पर करीब 300 से 400 मीटर प्रति लीटर का माइलेज देते हैं। इसका मतलब है कि 1 किलोमीटर उड़ने में लगभग 2.5 से 3 लीटर फ्लूल लग सकता है।

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अगर जेट आफ्टरबर्नर मोड में चला जाए तो फ्यूल की खपत 3 से 4 गुना तक बढ़ सकती है। इस दौरान फाइटर जेट का माइलेज घटकर 100 मीटर प्रति लीटर या उससे भी कम हो जाता है। आफ्टरबर्नर इंजन को अतिरिक्त ताकत देता है। इससे जेट तेज स्पीड पकड़ लेता है।

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जानकारी के अनुसार, ट्विन इंजन और भारी जेट सबसे ज्यादा फ्यूल खर्च करते हैं। इसमें F-22 Raptor और Su-30 MKI हैं। F-22 एक घंटे में 8,000 से 10,000 लीटर तक फ्यूल जला सकता है। वहीं Su-30 MKI भी 7,500 से 9,000 लीटर प्रति घंटा तक खर्च कर सकता है। हल्के और सिंगल इंजन जेट जैसे Saab Gripen और भारत का LCA Tejas बाकी के मुकाबले कम ईंधन खर्च करते हैं। इसमें खपत करीब 2,000 से 3,000 लीटर प्रति घंटा के बीच हो सकती है।