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Indane New Gas Cylinder: देश में गैस सिलेंडर के दाम काफी बढ़ गए हैं। घर में इस्तेमाल होने वाले सिलेंडर का रेट ही 1000 के करीब पहुंच गया है। आज भी कई परिवार ऐसे हैं, जिनके लिए इतना महंगा सिलेंडर खरीदना मुश्किल है। इसलिए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOL) ने इंडेन ब्रांड का एक नया सिलेंडर लॉन्च किया है, जो इतना सस्ता है कि आप लाल-नीले रंग का लोहे का भारी सिलेंडर भूल जाएंगे।
फाइबर गैस सिलेंडर

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नए सिलेंडर को फाइबर या कंपोजिट गैस सिलेंडर कहते हैं। यह फाइबर ओर प्लास्टिक कंपोजिट मैटेरियल से बनता है। इसलिए यह लोहे के सिलेंडर से काफी हल्का होता है, जिसे महिलाएं-बच्चे और बुजुर्ग कोई भी आसानी से उठा सकता है। उठाकर एक से दूसरी जगह रखना, ले जाना भी काफी आसान हैं। इस सिलेंडर कर डिजाइन भी थोड़ा ट्रासंपेरेंट होता है, जिस वजह से सिलेंडर में बची गैस का लेवल भी देखा जा सकता है।
फाइबर गैस सिलेंडर की कीमत

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फाइबर गैस सिलेंडर की कीमत वजन के अनुसार अलग-अलग होती है। कंपनी ने पहले 10 किलो का फाइबर सिलेंडर लॉन्च किया, जिसमें 750 से 900 रुपये में गैस भरवाई जा सकती है और इसका सिक्योरिटी डिपॉजिट अमाउंट 3000 से 3500 रुपये है। इसके बाद 5 किलो का फाइबर सिलेंडर लॉन्च किया, जिसमें 400 से 500 रुपये में गैस भरवाई जा सकती है और इसका सिक्योरिटी डिपॉजिट अमाउंट 2000 से 2500 रुपये तक है।
2 किलो का सिलेंडर भी लॉन्च

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बता दें कि फाइबर गैस सिलेंडर हल्का, सुरक्षित और सस्ता है, इसलिए कई वर्ग के लोगों में इसकी डिमांड भी है। इसे देखते हुए कंपनी ने अब 2 किलो का सिलेंडर भी लॉन्च कर दिया है। जिसमें गैस 200 से 300 रुपये में भरवाई जा सकती है। इसे मुन्ना सिलेंडर कहते हैं, जिसे खासतौर पर छात्र-छात्राओं, छोटे परिवारों, किराएदारों, नौकरी करने वाले सिंगल रूम में रहने वालों, स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को लिए बनाया गया है।
कहां से खरीदें फाइबर गैस सिलेंडर?

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फाइबर गैस सिलेंडर लॉन्च हो गया है, लेकिन अभी यह देशभर के शहरों में उपलब्ध नहीं है। वहीं जहां यह सिलेंडर उपलब्ध है, वहां इसके सबसे छोटे सिलेंडर को किराना दुकानों से खरीदा जा सकता है। बड़ा सिलेंडर लेने के लिए आपको नजदीकी Indane गैस एजेंसी से संपर्क करना होगा। आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और पते का प्रमाण दिखाकर सिक्योरिटी डिपॉजिट करके सिलेंडर, रेगुलेटर और गैस पाइप मिल जाएगा।
फाइबर गैस सिलेंडर के फायदे

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फाइबर गैस सिलेंडर का वजन करीब 7 से 8 किलो होता है, जबकि लाल-नीला सिलेंडर भारी होने के साथ-साथ 14 से 20 किलो का होता है, जिस वजह से उसे उठाने के लिए 2 लोगों की जरूरत पड़ती। फाइबर गैस सिलेंडर में गैस का लेवल नजर आता है, जबकि लोहे के सिलेंडर में ऐसा नहीं होता। इसमें जंग नहीं लगती और इसके फटने की संभावना भी न के बराबर होती है। आग लगने पर यह धीरे-धीरे पिघलता है। गैस रिफिल की कीमत में ज्यादा अंतर नहीं, लेकिन सुरक्षित और हल्का है।