माता-पिता की ये 5 गलतियां बच्चे की रीढ़ को कर सकती हैं खराब, डॉक्टर ने कहा आगे चलकर बिगड़ सकता है पोश्चर

छोटे बच्चे को ठीक तरह से बैठाया या लेटाया ना जाए तो उसकी रीढ़ खराब हो सकती है और हमेशा के लिए पोश्चर पर असर पड़ता है. ऐसे में यहां जानिए कहीं डॉक्टर की बताई गलतियां आप तो नहीं करते.

What can damage a baby's spine
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What can damage a baby's spine

Parenting Mistakes: छोटे बच्चे का शरीर डेवलपमेंट स्टेज पर होता है और पूरी तरह से विकसित नहीं होता है. ऐसे में पैरेंट्स की छोटी-छोटी गलतियां भी उसके शरीर पर गहरा असर छोड़ जाती हैं. पीडियाट्रिशियन डॉ. अर्पित गुप्ता ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से वीडियो शेयर करके बताया है कि पैरेंट्स की कुछ गलतियां बच्चे की रीढ़ को खराब (Spine Damage) कर सकती हैं. इससे आगे चलकर बच्चे का पोश्चर, रीढ़ और चलने की डेवलपमेंट प्रभावित होती है.

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बच्चे को जल्दी बैठाना

बच्चे को जल्दी बैठाना2 / 7

बच्चा जबतक 5 महीने का ना हो जाए तबतक उसे जबरदस्ती बैठाने की कोशिश ना करें. बच्चे की रीढ़ और कोर मसल्स जबतक तैयार ना हों उसे बैठाने से परहेज करें.

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बच्चे को उसके हाथ पकड़कर उठाना

बच्चे को उसके हाथ पकड़कर उठाना 3 / 7

बच्चे को अक्सर ही माता-पिता उसके हाथ पकड़कर उठाने लगते हैं. इससे बच्चे को पुल्ड एल्बो यानी कोहनी खिंचने, गर्दन पर दबाव पड़ने और कमर में चोट लगने का खतरा रहता है. इसीलिए बच्चे को उठाते समय हमेशा उसकी गर्दन, छाती और पीठ को सहारा दें.

रॉकर या कार सीट पर बहुत ज्यादा समय बिताना

रॉकर या कार सीट पर बहुत ज्यादा समय बिताना 4 / 7

बच्चे को रॉकर या कार सीट पर बहुत ज्यादा समय बिताने नहीं देना चाहिए. अगर बच्चा इनपर पूरा दिन रहता है तो बच्चे की मूवमेंट बाधित होने लगती है, मसल्स की डेवलपमेंट पर असर पड़ता है.

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टमी टाइम ना देना

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दिन में बच्चे को टमी टाइम देना यानी उसे उसके पेट पर लिटाना जरूरी होता है. टमी टाइम बच्चे की गर्दन, कंधों और कोर मसल्स को मजबूत बनाता है. यह फ्यूचर माइलस्टोन यानी रॉलिंग, सिटिंग और क्रॉलिंग में मदद करता है.

वॉकर का इस्तेमाल करना

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बच्चे के लिए वॉकर का इस्तेमाल करना एक बड़ी गलती साबित होता है. यह नेचुरल वॉकिंग डेवलपमेंट को धीमा करता है, मसल्स को कमजोर बनाता है और चोट का कारण बन सकता है.

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क्या करना चाहिए

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बच्चे को रोजाना टमी टाइम दें, उसे फर्श पर खेलने के लिए कहें, माइलस्टोन को फोर्स ना करें और पेशेंट रहें. हर बच्चा अपनी स्पीड से डेवलप करता है इसीलिए तुलना या प्रेशर पर जोर ना दें. इससे स्ट्रेस बढ़ता है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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