आंतों के गुड बैक्टीरिया के लिए वरदान हैं ये प्रीबायोटिक फूड्स, AIIMS के ट्रेंड डॉक्टर ने कहा डाइट में जरूर करें शामिल
Prebiotic Foods Explain: सुबह नाश्ते में ओट्स और सेब ले सकते हैं. लंच में दाल और सब्जियों के साथ प्याज शामिल करें. वहीं, लहसुन को दाल या सब्जी में इस्तेमाल किया जा सकता है. इस तरह एम्स के ट्रेंड डॉक्टर के बताए इन फूड्स से आपकी डाइट हेल्दी रहेगी.

हमारी आंतों में करोड़ों बैक्टीरिया रहते हैं, जिन्हें मिलाकर गट माइक्रोबायोम कहा जाता है. इनमें कुछ बैक्टीरिया शरीर के लिए फायदेमंद माने जाते हैं. इन अच्छे बैक्टीरिया को सही तरह का पोषण देने के लिए डाइट में प्रीबायोटिक फूड्स शामिल करना फायदेमंद हो सकता है. प्रीबायोटिक ऐसे होते हैं जिन्हें शरीर पूरी तरह पचा नहीं पाता, लेकिन ये आंतों के लिए फायदेमंद हो सकते हैं. अगर आप अपनी गट हेल्थ को बेहतर रखने के लिए डाइट में बदलाव करना चाहते हैं तो डाइट में इस चीजों को जरूर शामिल करें.
लहसुन
2 / 7लहसुन में फ्रुक्टोज और इंसुलिन जैसे प्रीबायोटिक कार्बोहाइड्रेट पाए जाते हैं. ये आंतों में मौजूद कुछ बैक्टीरिया के लिए फर्मेंटेबल सब्सट्रेट का काम कर सकते हैं. इसलिए खाने में स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ लहसुन को भी डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है. आप इसे सब्जी, दाल, चटनी या सूप में शामिल कर सकते हैं. इसे भी पढ़ें- उष्ट्रासन करने पर क्या होता है? आयुष मंत्रालय ने बताए फायदे, जानिए कैसे करते हैं यह योग
प्याज
3 / 7प्याज भी प्रीबायोटिक फूड्स की लिस्ट में शामिल किया जाता है. इसमें इंसुलिन और फ्रुक्टो-ओलिगोसैकराइड्स जैसे कंपाउंड पाए जाते हैं, जो कुछ गट बैक्टीरिया के लिए फायदेमंद हो सकते हैं. इसलिए आप प्याज को सलाद, सब्जी, दाल या सूप बनाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं.
हरा केला
4 / 7हरा या थोड़ा कच्चा केला रेसिस्टेंट स्टार्च का अच्छा स्रोत होता है. यह स्टार्च छोटी आंत में पूरी तरह पचने के बजाय बड़ी आंत तक पहुंच सकता है, जहां गट माइक्रोबायोटा इसका इस्तेमाल कर सकता है. हरा केला सब्जी के रूप में या उबालकर खाया जा सकता है.
ओट्स
5 / 7ओट्स में बीटा-ग्लूकन और फाइबर पाया जाता है. नाश्ते में ओट्स को दूध या दही, फल और नट्स के साथ लिया जा सकता है. ज्यादा चीनी वाले इंस्टेंट फ्लेवर्ड ओट्स की जगह सादा ओट्स बेहतर ऑप्शन हो सकता है.
सेब
6 / 7सेब में पेक्टिन नाम का फाइबर पाया जाता है. यह गट माइक्रोबायोटा के लिए फर्मेंटेबल फाइबर का स्रोत हो सकता है. सेब को छिलके सहित खाने से डाइट में फाइबर की मात्रा भी बढ़ सकती है, बशर्ते उसे अच्छी तरह धोकर खाया जाए. मीठा खाने की इच्छा होने पर सेब जरूर खाएं.
दालें
7 / 7मसूर, चना, राजमा और दूसरी दालों में फाइबर और रेजिस्टेंट स्टार्च जैसे घटक पाए जाते हैं. ये बड़ी आंत में पहुंचकर गट माइक्रोबायोटा के लिए फर्मेंटेबल सब्सट्रेट का काम कर सकते हैं. डाइट में अलग-अलग तरह की दालों को शामिल करने से फाइबर का सेवन बढ़ाया जा सकता है. इसे भी पढ़ें- किडनी पर पानी की छोटी थैलियां जमना भी है बीमारी, जानिए क्या है इस Kidney Cyst के लक्षण अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है. Source- AIIMS