What To Eat In Menopause: 45 से 55 वर्ष की उम्र के बाद महिलाएं मेनोपॉज से गुजरती हैं. मेनोपॉज एक बायोलॉजिकल स्टेज है जिसमें महिलाओं को पीरियड्स होना बंद हो जाते हैं. बढ़ती उम्र में अगर किसी महिला को 12 दिनों तक पीरियड्स नहीं हुए हैं तो इसे मेनोपॉज कहा जाता है. मेनोपॉज में महिलाओं का शरीर एक नहीं बल्कि कई दिक्कतों से गुजरता है. इसी बारे में बताते हुए डाइटीशियन श्वेता पांचाल ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल से एक वीडियो शेयर किया है और बताया है कि मेनोपॉज के दौरान होने वाली दिक्कतों को कम करने के लिए महिलाएं किस एक सुपरफूड को खा सकती हैं.
मेनोपॉज से जुड़ी दिक्कतें होती हैं दूर

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डाइटीशियन श्वेता शाह ने बताया कि प्रीमेनोपॉज और मेनोपॉज के दौरान शरीर में कई दिक्कतें होने लगती हैं, जैसे बैली फैट बढ़ना, हॉट फ्लैशेज यानी जरूरत से ज्यादा गर्मी लगना या बोन डेंसिटी कम होना. ऐसे में इन दिक्कतों से छुटकारा पाने के लिए आप इस एक सुपरफूड को खा सकते हैं.
इस देसी सुपरफूड को खाएं

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मेनोपॉज की दिक्कतों को कम करने के लिए देसी सुपरफूड मखाना खाया जा सकता है. इसे शाम के समय स्नैक की तरह खा सकते हैं. यह कैल्शियम और फॉस्फोरस का अच्छा स्त्रोत होता है यानी कैल्शियम सिर्फ एब्जॉर्ब नहीं होता बल्कि आपकी हड्डियों में जाकर जमा भी होता है.
ग्लाइसेमिक इंडेक्स है कम

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मखाने का एक फायदा यह भी है कि इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स बेहद कम होता है. इसका मतलब है कि मेनोपॉज के दौरान अगर आपको इंसुलिन रेजिस्टेंस या बैली फैट की दिक्कतें हो रही हों तो मखाना इन दिक्कतों से निपटने में मदद करता है.
हॉट फ्लैशेज से छुटकारा

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हॉट फ्लैशेज कम करने के लिए मखाना में मैग्नीशियम और पौटेशियम होता है. यह दोनों साथ में मिलकर हॉट फ्लैशेज की फ्रीक्वेंसी भी कम करते हैं और इंटेसिटी को भी कम करने लगते हैं.
फ्लेवेनॉइड्स भी होते हैं

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मखाना में बहुत से फ्लेवेनॉइड्स भी होते हैं. फ्लेवेनॉइड्स दिल, दिमाग और स्किन को ऑक्सीडेटिव डैमेज से हमेशा प्रोटेक्टेड रखते हैं.