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Diabetic Foot Ke Lakshan: डायबेटिक फूट वह स्थिति है जब डायबिटीज का असर पैरों पर होने लगता है. इसे डायबेटिक नैचुरोपैथी कहते हैं. इसमें पैरों पर घाव बनना शुरू होता है और भरता नहीं है. लेकिन, अक्सर ही लोगों को डायबेटिक फूट के शुरुआती लक्षण पहचान में नहीं आते हैं और जबतक वे डायबेटिक फूट को समझ पाते हैं तबतक दिक्कत जरूरत से ज्यादा बढ़ चुकी होती है. ऐसे में समय रहते डायबेटिक फूट की दिक्कत (Diabetic Foot Symptoms) पहचानना जरूरी होता है.
पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन

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पैरों में झनझनाहट होना या सुन्नपन होना डायबेटिक नैचुरोपैथी का लक्षण हो सकता है. इसमें हल्की चुभन और जलन भी महसूस होती है.
घाव का ना भरना

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पैर पर लगा छोटा सा भी घाव जल्दी नहीं भरता है. मामूली छाला भी हो जाए तो जल्दी ठीक नहीं होता है और हीलिंग की प्रक्रिया धीमी पड़ने लगती है
पैरों की त्वचा का कटना-फटना

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पैरों की स्किन सूखी और ड्राई हो जाती है. इससे त्वचा कटने-फटने लगती है और इंफेक्शन की संभावना बढ़ना शुरू हो जाती है.
पैरों का रंग बदलना

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आपको पैरों की त्वचा की रंगत बदली हुई नजर आने लगती है. पैरों तक ब्लड सर्कुलेशन ठीक से ना होने के कारण त्वचा का रंग बदलता है.
सूजन या दर्द

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पैरों में अक्सर ही सूजन या दर्द रहने लगता है. यह डायबिटीज और डायबेटिक फूट के शुरुआती लक्षणों में शामिल है.
बार-बार इंफेक्शन होना

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डायबेटिक फूट का एक शुरुआती लक्षण यह भी है कि पैरों में बार-बार लक्षण होने लगते हैं. ये लक्षण बताते हैं कि पैरों पर गंभीर दिक्कत होने लगी है.