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नई रिसर्च से पता चला है कि कैंसर सर्वाइवर्स जो अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड ज्यादा खाते हैं, उनमें कुल मृत्यु दर और कैंसर से जुड़ी मौत का खतरा तेजी से बढ़ जाता है. इतालवी स्वास्थ्य अध्ययन में 802 सर्वाइवर्स के आंकड़ों से यह साफ हुआ कि इन खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन समय से पहले मौत का कारण बन सकता है.
अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का खतरा

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कैंसर सर्वाइवर्स में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का सबसे ज्यादा सेवन करने वालों में मौत का जोखिम कहीं अधिक पाया गया. इटली के न्यूरोमेड संस्थान की डॉ. मरियालौरा बोनॉसियो ने 802 मरीजों के रिकॉर्ड का विश्लेषण किया. धूम्रपान, शारीरिक गतिविधि और डाइट क्वालिटी समायोजित करने पर भी खतरा कम नहीं हुआ.
क्यों खराब हैं अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड?

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अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड में इंडस्ट्रियल आइटम्स और प्रक्रियाओं से बने आइटम आते हैं, जैसे मीठे ड्रिंक्स, प्रोसेस्ड मीट और पैकेज्ड डेसर्ट. ये घरेलू तरीकों से नहीं बनते. पोषण लेबल पर समान दिखने के बावजूद शरीर पर अलग असर डालते हैं.
वजन आधारित माप का महत्व

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शोधकर्ताओं ने कैलोरी के बजाय भोजन के वजन से सेवन मापा, क्योंकि प्लेट भरने का मतलब हमेशा ऊर्जा नहीं होता. इससे कुल और कैंसर मौतों का संबंध स्पष्ट हुआ. बोतलबंद ड्रिंक का वजन ज्यादा लेकिन कैलोरी कम हो सकती है.
पोषक तत्वों से परे समस्या

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केवल कैलोरी या पोषक तत्व खतरे की पूरी व्याख्या नहीं करते. इंडस्ट्रियल एटक्टिव्स, बनावट और तेज अवशोषण से मेटाबॉलिज्म बिगड़ता है. आंत के सूक्ष्मजीव भी प्रभावित होते हैं. डॉ. बोनॉसियो ने कहा कि प्रोसेसिंग ही मुख्य मुद्दा है.
शरीर में सूजन का संबंध

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अधिक सेवन से सूजन बढ़ती है और हृदय गति तेज हो जाती है. इन कारकों को समायोजित करने पर मौत का लिंक 37 प्रतिशत कमजोर पड़ा. यह जैविक मार्ग का संकेत देता है. भविष्य के परीक्षणों के लिए आधार बनेगा.
कोई एक दोषी नहीं

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प्रोसेस्ड मीट या शुगर प्रोडक्ट्स खराब दिखे, लेकिन सभी कैटेगरी एक जैसी नहीं. कुल सेवन ही मायने रखता है. डॉ. बोनॉसियो ने चेतावनी दी कि किसी एक आइटम पर फोकस न करें. समग्र आदत बदलें.
कैंसर सर्वाइवर्स के लिए विशेष जोखिम

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कैंसर के बाद तनाव, दवाएं और ऊतक रिकवरी से शरीर कमजोर रहता है. डाइट की गुणवत्ता यहां ज्यादा मायने रखती है. अध्ययन निदान के 8.4 साल बाद का है.
फ्रिज में क्या रखें?

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फ्रिज से अल्ट्रा-प्रोसेस्ड आइटम हटाएं, घर का खाना, फल-सब्जियां, दही, अंडे और दालें अपनाएं. यह अध्ययन कैंसर एपिडेमियोलॉजी जर्नल में प्रकाशित हुआ. सावधानी बरतें और डॉक्टर से सलाह लें.