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आजकल वर्क फ्रॉम होम और डिजिटल लाइफ के दौर में हम घंटों कुर्सी पर चिपके रहते हैं और टॉयलेट में भी मोबाइल फोन हमारा सबसे पक्का साथी बन गया है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह आराम ही आपकी सबसे बड़ी मुसीबत बन सकता है? जी हां, पाइल्स यानी बवासीर की समस्या आज युवाओं में भी तेजी से पैर पसार रही है. आज इस फोटो गैलरी में हम उन 5 आदतों को बेनकाब करेंगे जो अनजाने में आपको बवासीर की ओर धकेल रही हैं.
कब्ज (Constipation) है सबसे बड़ा गुनहगार

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बवासीर होने की सबसे बड़ी वजह लंबे समय तक रहने वाली कब्ज है. जब पेट साफ नहीं होता, तो मल त्याग (Bowel movement) के समय मलाशय की नसों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिससे वे फूल जाती हैं और बवासीर का रूप ले लेती हैं.
लो-फाइबर डाइट

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अगर आपके खाने में फाइबर (Fiber) की कमी है, तो मल सख्त हो जाता है. मैदा, फास्ट फूड और प्रोसेस्ड खाने का ज्यादा सेवन पेट की दुश्मन है. फाइबर युक्त फल, सब्जियां और साबुत अनाज की कमी सीधे तौर पर पाइल्स को दावत देती है.
टॉयलेट सीट पर लंबा समय - मोबाइल का मोह!

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क्या आप भी टॉयलेट में मोबाइल लेकर जाते हैं? टॉयलेट सीट पर ज्यादा देर तक बैठे रहने से एनस (Anus) की नसों पर लगातार दबाव बना रहता है. मॉडर्न लाइफस्टाइल की यह आदत बवासीर के खतरों को कई गुना बढ़ा देती है.
फिजिकल एक्टिविटी की कमी - घंटों एक जगह बैठना

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जो लोग दिन भर डेस्क जॉब करते हैं या घंटों तक एक ही जगह बैठे रहते हैं, उनके निचले हिस्से की ब्लड वेसल्स पर दबाव बढ़ जाता है. व्यायाम न करने और आलसी जीवनशैली के कारण ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है, जो पाइल्स का कारण बनता है.
प्रेगनेंसी और बढ़ता वजन - भारीपन का असर

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गर्भावस्था के दौरान गर्भाशय का दबाव नसों पर पड़ता है, जिससे कई महिलाओं को बवासीर की समस्या हो जाती है. ठीक इसी तरह, मोटापे (Obesity) के कारण शरीर का अतिरिक्त भार पेल्विक एरिया की नसों पर दबाव डालता है, जो बवासीर पैदा कर सकता है.
बचाव का छोटा सा मंत्र:

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खूब पानी पिएं. दिन में कम से कम 8-10 गिलास पानी का सेवन जरूर करें. खाने में फाइबर बढ़ाएं जैसे कि सलाद और चोकर वाला आटा खाएं. इसके अलावा एक्टिव रहें. रोजाना 30 मिनट वॉक करें.