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India oldest wine shop: हम आज अपने आसपास कदम-कदम पर सैकड़ों शराब की दुकानें देखते हैं. लेकिन यह कहानी सिर्फ शराब की नहीं, बल्कि ब्रिटिश नीति, सांस्कृतिक बदलाव और आर्थिक नियंत्रण की है. भारत में शराब पीने की परंपरा हजारों साल पुरानी थी. प्राचीन ग्रंथों में सोमरस का जिक्र है, लेकिन वह धार्मिक और औषधीय थी. आधुनिक दुकानदार शैली अंग्रेजों ने लाई जो टैक्स और नियंत्रण का हिस्सा थी. अंग्रेजों के आने से पहले देश में देशी महुआ, ताड़ी या हांड़िया जैसी चीजें तो थीं, लेकिन दुकान के रूप में बिक्री का यह नया तरीका ब्रिटिश राज की देन माना जाता है.
कोलकाता में पहली शराब की दुकान खोली

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ब्रिटिश राज काल के नियमन दस्तावेज़ के मुताबिक, कोलकाता उस समय ब्रिटिश व्यापार का केंद्र था. 1760 के आसपास कलकत्ता में अंग्रेजों ने पहली शराब की दुकान खोली. उस समय रोबर्ट क्लाइव यहां के गवर्नर थे और ईस्ट इंडिया कंपनी का दबदबा बढ़ रहा था. कंपनी के सैनिकों और अधिकारीयों के लिए यह दुकान बनाई गई ताकि उनकी जरूरत पूरी हो सके.
शराब के कारोबार की नींव, लोकल अरक बेची

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आज भी कई लोग मानते हैं कि 1760 की उस कोलकाता वाली दुकान ने पूरे देश में शराब के कारोबार की नींव रखी. नासिक में 1847 की दुकान को पुरानी माना जाता है, लेकिन कोलकाता वाला पहला कदम था. यहां बंदरगाह के पास यह दुकान खुली जहां यूरोपीय स्पिरिट्स और लोकल अरक बेची जाने लगी. धीरे-धीरे भारतीय भी इसकी तरफ आकर्षित हुए और शराब का बाजार फैलने लगा.
दुकान खोलने का मकसद सिर्फ व्यापार नहीं

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लोकप्रिय ऐतिहासिक दावों के मुताबिक इस दुकान को खोलने का मकसद सिर्फ व्यापार नहीं था. आधुनिक दुकानदार शैली अंग्रेजों ने लाई जो टैक्स और नियंत्रण का हिस्सा थी. अंग्रेजों के आने से पहले देश में देशी महुआ, ताड़ी या हांड़िया जैसी चीजें तो थीं, लेकिन दुकान के रूप में बिक्री का यह नया तरीका ब्रिटिश राज की देन माना जाता है.
1782 में पाबंदी, 1805 में ब्रिटिश डिस्टलरी

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कई इतिहासकार और लोककथाएं कहती हैं कि अंग्रेजों ने जानबूझकर भारतीयों को शराब की लत लगाने की कोशिश की ताकि एकता टूटे और स्वतंत्रता की भावना कमजोर पड़े. 1782 में कलकत्ता के आसपास कुछ दुकानों पर पाबंदी लगाई ताकि सैनिक ज्यादा न पी सकें. फिर भी व्यवसाय बढ़ता गया. 1805 में कानपुर में पहली ब्रिटिश डिस्टलरी शुरू हुई जो रम बनाती थी.