क्या हेलमेट की कोई एक्सपायरी डेट होती है? इसे कितने साल बाद बदलना चाहिए?

बाइक या स्कूटर चलाते समय हेलमेट आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा ढाल होता है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि हेलमेट की भी एक तय उम्र होती है. जानतें है क्या हेलमेट की कोई एक्सपायरी डेट होती है? इसे कितने साल बाद बदलना चाहिए?

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क्या आपका हेलमेट सिर्फ दिखने में नया है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक हेलमेट की भी एक्सपायरी डेट होती है और समय पर न बदलने पर यह हादसे में आपकी जान बचाने में नाकाम हो सकता है.

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क्या सच में हेलमेट एक्सपायर हो जाता है?

क्या सच में हेलमेट एक्सपायर हो जाता है?2 / 6

जी हां, हेलमेट भी एक समय बाद एक्सपायर माना जाता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक एक अच्छे क्वालिटी वाले हेलमेट की उम्र करीब 3 से 5 साल होती है. हेलमेट के अंदर मौजूद सफेद सुरक्षा परत समय के साथ पसीने, तेल और नमी की वजह से कमजोर होने लगती है. ऐसे में एक्सीडेंट के दौरान यह झटके को सही तरीके से नहीं झेल पाती.

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बाहर से सही दिखने वाला हेलमेट भी हो सकता है खतरनाक

बाहर से सही दिखने वाला हेलमेट भी हो सकता है खतरनाक3 / 6

अगर हेलमेट कभी ऊंचाई से गिर जाए या किसी छोटे एक्सीडेंट में इस्तेमाल हो चुका हो, तो उसे बदल देना बेहतर माना जाता है. कई बार हेलमेट बाहर से बिल्कुल ठीक दिखाई देता है, लेकिन अंदर की सुरक्षा परत में दरार आ चुकी होती है, जो हादसे के समय बड़ा खतरा बन सकती है.

हेलमेट साफ करने का सही तरीका क्या है?

हेलमेट साफ करने का सही तरीका क्या है?4 / 6

हेलमेट को लंबे समय तक सुरक्षित और बदबू से दूर रखने के लिए नियमित सफाई जरूरी है. अगर हेलमेट की अंदरूनी पैडिंग निकलती है, तो उसे गुनगुने पानी और हल्के शैंपू से साफ करें. ध्यान रखें कि हेलमेट को कभी भी वॉशिंग मशीन में न डालें. वहीं शीशे को साफ करने के लिए माइक्रोफाइबर कपड़ा और सादा पानी इस्तेमाल करना सबसे सही तरीका माना जाता है.

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धूप में रखने से पहले ये बात जरूर जान लें

धूप में रखने से पहले ये बात जरूर जान लें5 / 6

पसीने की बदबू और बैक्टीरिया खत्म करने के लिए हेलमेट को कभी-कभी हल्की धूप में रखा जा सकता है. हालांकि इसे लंबे समय तक तेज धूप में छोड़ना सही नहीं माना जाता, क्योंकि ज्यादा गर्मी से हेलमेट का प्लास्टिक और बाहरी परत कमजोर हो सकती है.

नया हेलमेट खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान

नया हेलमेट खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान6 / 6

हमेशा ISI मार्क वाला हेलमेट ही खरीदना चाहिए, क्योंकि यह सुरक्षा मानकों को पूरा करता है. सस्ते और बिना प्रमाणित हेलमेट दुर्घटना के समय सही सुरक्षा नहीं दे पाते. ऐसे हेलमेट बाहर से मजबूत दिख सकते हैं, लेकिन हादसे में आसानी से टूट सकते हैं.

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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