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फोर्ब्स की ताजा वर्ल्ड बिलियनेयर्स लिस्ट ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दम पर 30 साल से कम उम्र के 35 नए अरबपतियों को जन्म दिया है. इनमें भारतीय मूल की 22 वर्षीय सूर्या मिधा का नाम सबसे ऊपर रहा, जिन्होंने मर्कॉर स्टार्टअप के सह-संस्थापक के रूप में मार्क जुकरबर्ग का 23 साल पुराना रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया. उनकी संपत्ति 2.2 बिलियन डॉलर आंकी गई है.
कौन हैं सूर्या मिधा?

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सूर्या मिधा का जन्म कैलिफोर्निया के सैन जोस में दिल्ली मूल के अप्रवासी भारतीय माता-पिता के घर हुआ. हाईस्कूल में नेशनल डिबेट चैंपियन रहीं सूर्या ने जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से विदेशी अध्ययन में स्नातक किया. उनके सह-संस्थापक आदर्श हीरेमठ (हार्वर्ड) और ब्रेंडन फूडी (जॉर्जटाउन इकोनॉमिक्स) के साथ मिलकर उन्होंने कॉलेज छोड़ मर्कॉर की नींव रखी.
कैसे काम करता है मर्कॉर?

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मर्कॉर एक एआई आधारित भर्ती प्लेटफॉर्म है, जो सिलिकॉन वैली की प्रमुख लैब्स जैसे ओपनएआई और मेटा को एक्सपर्ट्स उपलब्ध कराता है. यहां उम्मीदवारों का इंटरव्यू एआई अवतार लेता है, जबकि कंपनी डेटा लेबलिंग के जरिए मॉडल ट्रेनिंग में मदद करती है. पिछले साल निजी निवेशकों ने इसकी वैल्यूएशन 10 बिलियन डॉलर तय की, जिससे संस्थापकों की हिस्सेदारी ने उन्हें अरबपति बना दिया.
मार्क जुकरबर्ग का तोड़ा रिकॉर्ड

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आपको बता दें कि 18 साल पहले मार्क जुकरबर्ग 23 साल की उम्र में फोर्ब्स लिस्ट में शामिल हुए थे, लेकिन सूर्या और उनके साथी 22 साल में ही इस मुकाम पर पहुंच गए. तीनों के पास कंपनी में लगभग 22 प्रतिशत शेयर हैं, जो तेजी से बढ़ी वैल्यूएशन के दम पर इतनी संपत्ति बना गए.
फोर्ब्स लिस्ट में कौन-कौन शामिल?

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लिस्ट में 35 युवा अरबपतियों में आठ अमेरिकी हैं, जिनमें सभी सेल्फ-मेड हैं, जबकि यूरोपीय ज्यादातर उत्तराधिकारी. 13 यूरोप और छह एशिया में रहते हैं, जिनमें लोपेज लारा जैसे नाम शामिल हैं. भारतवंशी सूर्या की सफलता प्रवासी युवाओं के लिए प्रेरणा बनी हुई है.
सबसे युवा महिला अरबपति कौन?

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29 साल की लुआना लोपेज लारा इस सूची की सबसे कम उम्र की सेल्फ-मेड महिला अरबपति हैं, जिन्होंने पूर्व बैले डांसर से एमआईटी ग्रेजुएट बन प्रेडिक्शन मार्केट फर्म कलशी की सह-स्थापना की. उन्होंने लूसी गुओ को पछाड़ा, जिन्होंने पहले यह तमगा जीता था. उनके पार्टनर तारेक मंसूर भी नए अरबपतियों में शुमार हैं.
मर्कॉर की फंडिंग

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मर्कॉर ने दो साल में 32 मिलियन डॉलर फंडिंग जुटाई और पहले साल ही मुनाफा कमा लिया. शुरुआत भारत के इंजीनियरों को अमेरिकी फर्मों से जोड़ने से हुई, जो अब 30,000 एक्सपर्ट्स का नेटवर्क है. इसका सालाना रेवेन्यू 500 मिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है.