Petrol Diesel Price: केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए संकेत दिया कि अगर हाल ही में खरीदा गया कम कीमत वाला कच्चा तेल भारतीय रिफाइनरियों तक पहुंचता है तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी आ सकती है. साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक तेल बाजारों में तीव्र अस्थिरता के बावजूद घरेलू ईंधन की कीमतों में केवल सीमित वृद्धि हुई है.
30 डॉलर प्रति बैरल सस्ता है क्रूड ऑयल

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अमेरिका ईरान जंग शुरू होने से पहले कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल थी, जंग के दौरान इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल का दाम 110 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा हो गया था, जोकि आज शांति समझौते के बाद 80 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है, लेकिन पेट्रोल-डीजल की कीमतों में अभी कमी नहीं आई है.
सस्ता पेट्रोल डीजल मिलने में लगेगा वक्त

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मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ईंधन की कीमतों का बचाव किया और कहा कि तेल विपणन कंपनियां (ओएमसी) वर्तमान में उच्च कीमतों पर खरीदे गए कच्चे तेल का प्रसंस्करण कर रही हैं और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की नरम दरों से खुदरा ईंधन की कीमतों में कोई भी लाभ दिखने में समय लगेगा.
भारत में ईंधन की कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर

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मंत्री ने कहा कि मिडिल ईस्ट में तनाव के बावजूद भारत में ईंधन की कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई हैं. पुरी ने कहा, "अगर हम वास्तविक स्थिति को देखें तो देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई वृद्धि नहीं हुई है." मोदी सरकार ने नवंबर 2021, मई 2022 और हाल ही में पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में कमी की थी, जिससे दोनों ईंधनों पर लगभग 10 रुपये प्रति लीटर का बोझ कम हुआ था.
केवल जापान में पेट्रोल में कम वृद्धि

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घरेलू ईंधन की कीमतों से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए पुरी ने कहा, "संयुक्त राष्ट्र में 193 देश हैं और केवल जापान में ही भारत की तुलना में पेट्रोलियम की कीमतों में कम वृद्धि देखी गई है." पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुल वृद्धि लगभग 7.60 रुपये तक सीमित रही है और दावा किया कि 2022 में रूस-यूक्रेन संघर्ष के दौरान प्रचलित स्तरों की तुलना में, ईंधन की कीमतों में प्रभावी रूप से वृद्धि नहीं हुई है.
तेल कंपनियों को 1000 करोड़ का नुकसान

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पुरी ने यह भी कहा कि तेल विपणन कंपनियां वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठा रही हैं, लेकिन सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि उपभोक्ताओं को कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के पूरे प्रभाव से बचाया जा सके. मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच ईंधन की कीमतों में वृद्धि हुई.