
1 / 6
दुनिया के दूसरे हिस्से में चल रही जंग का असर अब भारतीय रसोई और सड़कों पर दिखने वाला है। स्विट्जरलैंड में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक खिंचा, तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ना तय है।
तेल कंपनियों का दम फूल रहा है

2 / 6
गवर्नर मल्होत्रा ने बताया कि फिलहाल सरकार ने एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) घटाकर और सरकारी तेल कंपनियों ने नुकसान सहकर जनता को बढ़ी हुई कीमतों से बचा रखा है। लेकिन यह स्थिति ज्यादा दिनों तक नहीं चल सकती। कच्चा तेल (Crude Oil) लगातार महंगा हो रहा है, और कंपनियां इस बढ़े हुए बोझ को कब तक खुद उठाएंगी, यह बड़ा सवाल है।
पीएम मोदी का सेविंग मंत्र: न तेल जलाएं, न सोना खरीदें

3 / 6
इधर देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता से एक भावुक और जरूरी अपील की है। उन्होंने विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange) को बचाने के लिए दो अहम बातें कही हैं। बेवजह गाड़ी न चलाएं और पेट्रोल-डीजल के इस्तेमाल में किफायत बरतें। पीएम ने सलाह दी है कि फिलहाल सोने की खरीदारी टाल दें। सरकार ने सोने पर आयात शुल्क (Import Duty) भी दोगुने से ज्यादा कर दिया है ताकि लोग विदेशी सामान कम खरीदें और देश का पैसा बाहर न जाए।
महंगाई का मीटर: 3.48% पर पहुंचा आंकड़ा

4 / 6
अप्रैल महीने में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.48% हो गई है (मार्च में यह 3.40% थी)। हालांकि यह अभी नियंत्रण में दिख रही है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें $100 के ऊपर टिकी रहीं, तो ट्रांसपोर्टेशन महंगा होगा और हर चीज के दाम बढ़ जाएंगे।
सप्लाई चेन में जाम और मंदी का डर

5 / 6
युद्ध की वजह से समुद्री रास्तों से आने वाला माल (Freight) और तेल की सप्लाई बाधित हो रही है। इससे न केवल सामान महंगा हो रहा है, बल्कि भारत की आर्थिक विकास दर (Growth Rate) पर भी ब्रेक लग सकता है। RBI ने फिलहाल विकास दर 6.9% रहने का अनुमान लगाया है, लेकिन लंबी जंग इस गणित को बिगाड़ सकती है।
क्या कहता है RBI? (रेपो रेट अपडेट)

6 / 6
फिलहाल RBI ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है, जिसका मतलब है कि आपके लोन की EMI अभी नहीं बढ़ी है। लेकिन गवर्नर मल्होत्रा ने साफ कहा है कि हम हर डेटा पर नजर रखे हुए हैं। अगर महंगाई का दबाव बढ़ा, तो सख्त कदम उठाने (ब्याज दरें बढ़ाने) में हम पीछे नहीं हटेंगे। आसान शब्दों में कहें तो सरकार आपको आने वाले महंगे दिनों के लिए मानसिक रूप से तैयार कर रही है। बचत करना और फिजूलखर्ची रोकना ही फिलहाल सबसे अच्छा बचाव है।