अगर आप सोच रहे थे कि पिछले एक हफ्ते में पेट्रोल और डीजल के दामों में हुई 4 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद अब राहत मिलेगी, तो संभल जाइए! एनर्जी एक्सपर्ट्स का मानना है कि आम जनता की जेब पर बहुत जल्द एक और बड़ा बोझ आने वाला है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के कारण आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल के दाम 5 रुपये प्रति लीटर तक और बढ़ सकते हैं। आइए, समझते हैं कि आखिर तेल कंपनियां कीमतें बढ़ाने पर क्यों मजबूर हैं और इस पर एक्सपर्ट्स का क्या कहना है।
4 रुपये की बढ़ोतरी भी कम! अभी और महंगे होंगे पेट्रोल-डीजल

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हाल ही में तेल कंपनियों ने दो चरणों में पेट्रोल-डीजल के दाम करीब 4 रुपये प्रति लीटर (पहले 3 रुपये और फिर 90 पैसे) बढ़ाए थे। ET Now की एक रिपोर्ट के अनुसार जाने-माने एनर्जी एक्सपर्ट नरेंद्र तनेजा के मुताबिक, यह बढ़ोतरी तेल कंपनियों के नुकसान की भरपाई के लिए काफी नहीं है। कंपनियों का घाटा इतना बड़ा है कि आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर तक का एक और बड़ा इजाफा देखना पड़ सकता है।
तेल कंपनियों को हर दिन हो रहा था 1000 करोड़ रुपये तक का भारी नुकसान!

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हालिया बढ़ोतरी से पहले देश की बड़ी सरकारी तेल कंपनियां—इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) बेहद बुरे दौर से गुजर रही थीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होने और घरेलू बाजार में लंबे समय तक रेट न बढ़ने के कारण इन कंपनियों को हर दिन 750 करोड़ रुपये से लेकर 1000 करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था। मौजूदा बढ़ोतरी से इन्हें सिर्फ आंशिक (Partial) राहत मिली है।
पश्चिम एशिया का संकट और कमजोर रुपया बना बड़ी आफत

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कीमतों में संभावित बढ़ोतरी के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े वैश्विक कारण काम कर रहे हैं:
1. क्रूड ऑयल का झटका: पश्चिम एशिया (मिड-ईस्ट) में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल अचानक $65 प्रति बैरल से उछलकर करीब $115 प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है।
2. कमजोर रुपये की मार: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने से भारत के लिए तेल का आयात बिल (Import Bill) बहुत महंगा हो गया है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है।
आम जनता पर एक साथ नहीं डाला जाएगा पूरा बोझ, आसान किश्तों में लगेगी चपत!

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एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार इस बात से अच्छी तरह वाकिफ है कि अगर एक साथ ₹5 दाम बढ़ा दिए गए, तो इससे देश में महंगाई (Inflation) बेकाबू हो जाएगी और आम आदमी के घर का बजट पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगा। इसलिए, तेल कंपनियां एक बड़ा झटका देने के बजाय आने वाले दिनों में किश्तों में धीरे-धीरे (Gradual Hikes) दाम बढ़ाएंगी, ताकि जनता पर इसका सीधा और अचानक असर न पड़े।
क्या सरकार देगी कोई राहत? टैक्स कटौती पर टिकी नजरें

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तेल कंपनियों के घाटे को कम करने और जनता को बड़ी राहत देने के लिए सरकार के पास एक और रास्ता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, केंद्र सरकार आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) को थोड़ा कम कर सकती है। साथ ही, राज्य सरकारों से भी अपील की जा सकती है कि वे अपने हिस्से का वैट (VAT) घटाएं, ताकि ₹5 की इस संभावित बढ़ोतरी के असर को कम किया जा सके।