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पश्चिम एशिया के संकट और वैश्विक अस्थिरता के बीच भारतीय कंपनियों को बड़ी राहत मिलने वाली है। सरकार एक बार फिर इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) जैसी एक नई व्यवस्था लाने पर काम कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य चुनौतीपूर्ण समय में व्यवसायों को बिना किसी गारंटी के लोन उपलब्ध कराना और उनकी कार्यक्षमता को बनाए रखना है। हाल ही में संपन्न CII MSME लीडरशिप समिट 2026 में इस योजना के ब्लूप्रिंट पर महत्वपूर्ण चर्चा की गई है।
संकट के समय कंपनियों को मिलेगा क्रेडिट कवच

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पश्चिम एशिया में जारी संकट को देखते हुए सरकार कंपनियों की सहायता के लिए एक विशेष योजना लाने पर विचार कर रही है। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के अनुसार, ECLGS की तर्ज पर एक नया तंत्र पेश किया जा सकता है।
बिना कुछ गिरवी रखे मिलेगा लोन

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इस योजना के तहत कंपनियों को बिना किसी कोलैटरल (गारंटी के तौर पर कुछ गिरवी रखे) लोन मिल सकेगा। इससे कंपनियां अपनी नकदी की जरूरतों को पूरा कर सकेंगी और व्यवसाय का संचालन सुचारू रूप से जारी रख सकेंगी।
क्या-क्या सुविधाएं मिल सकती हैं?

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नई योजना में कोलैटरल-फ्री लोन के साथ-साथ क्रेडिट गारंटी, कर्ज पुनर्गठन (Debt Restructuring) और लोन मोराटोरियम जैसी सुविधाएं शामिल हो सकती हैं। एडिशनल सेक्रेटरी आतिश कुमार सिंह ने बताया कि इन सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर अभी विचार-विमर्श चल रहा है।
कच्चा माल जुटाना भी होगा आसान

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नेशनल स्मॉल इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन (NSIC) कार्यक्रम के तहत कच्चे माल की खरीद के लिए भी काम जारी है। सरकार आरबीआई (RBI) और अन्य नियामक निकायों से कुछ रेगुलेटरी छूट दिलाने पर भी विचार कर रही है।
2020 की ECLGS योजना से ली जाएगी सीख

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2020 में आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत ECLGS लॉन्च की गई थी, जिसने कोविड-19 से प्रभावित MSMEs की मदद की थी। पिछली योजना में 100% गारंटी, बिना प्रोसेसिंग फीस और ब्याज दरों पर कैप (सीमा) जैसी सुविधाएं दी गई थीं।
उद्योगों से मांगा गया फीडबैक

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सरकार इन प्रस्तावित उपायों पर उद्योगों और विशेषज्ञों से सुझाव और फीडबैक मांग रही है। योजना को इस तरह डिजाइन करना है कि यह अंतिम छोर तक पहुंचे और छोटे उद्योगों को अधिकतम लाभ मिले।