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टेक जगत से बड़ी खबर आ रही है! सोशल मीडिया दिग्गज मेटा (Meta) एक बार फिर बड़े पैमाने पर छंटनी की योजना बना रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार कंपनी अपने वर्कफोर्स में 20% तक की कटौती कर सकती है।
16,000 कर्मचारियों पर गिरेगी गाज?

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मेटा के पास फिलहाल करीब 79,000 कर्मचारी हैं। अगर 20% की कटौती होती है, तो लगभग 16,000 लोगों की नौकरी जा सकती है। यह जुकरबर्ग के 2022-23 वाले 'ईयर ऑफ एफिशिएंसी' के बाद सबसे बड़ी छंटनी होगी।
इंसान की जगह लेगा AI?

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छंटनी की सबसे बड़ी वजह Artificial Intelligence (AI) है। मार्क जुकरबर्ग का मानना है कि जो काम पहले बड़ी टीमें करती थीं, अब वे एआई की मदद से एक अकेला टैलेंटेड इंसान कर सकता है। कंपनी अब इंसानों से ज्यादा एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करना चाहती है।
एआई पर ₹50 लाख करोड़ का भारी निवेश!

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कैप्शन: मेटा एआई की रेस में गूगल और माइक्रोसॉफ्ट को पछाड़ना चाहता है। कंपनी ने 2028 तक डेटा सेंटर बनाने के लिए 600 बिलियन डॉलर (करीब ₹50 लाख करोड़) निवेश करने का लक्ष्य रखा है। इसी भारी खर्च की भरपाई के लिए नौकरियों में कटौती की जा रही है।
महंगे टैलेंट और नए स्टार्टअप्स की खरीदारी

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जहां एक तरफ छंटनी हो रही है, वहीं दूसरी तरफ मेटा एआई एक्सपर्ट्स को करोड़ों के पैकेज दे रहा है। हाल ही में मेटा ने Moltbook और चीनी स्टार्टअप Manus को खरीदने के लिए अरबों डॉलर खर्च किए हैं।
एआई प्रोजेक्ट्स में देरी और चुनौतियां

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मेटा को एआई के मोर्चे पर झटके भी लगे हैं। पिछले साल Llama 4 मॉडल को लेकर आलोचना हुई और बड़े मॉडल Behemoth को रोकना पड़ा। अब कंपनी Avocado नाम के नए मॉडल पर काम कर रही है, लेकिन इसकी परफॉरमेंस अभी उम्मीदों से कम है।
पूरी टेक इंडस्ट्री में छंटनी का दौर

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सिर्फ मेटा ही नहीं, जनवरी में अमेजन ने भी 16,000 नौकरियां कम की हैं। वहीं जैक डोर्सी की कंपनी Block ने अपना आधा स्टाफ निकाल दिया है। साफ है कि एआई के आने से टेक कंपनियों का काम करने का तरीका पूरी तरह बदल रहा है।