पासपोर्ट को आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय यात्रा और पहचान के सबसे बड़े दस्तावेज के रूप में देखा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया के सभी देशों में पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम या पक्का कानूनी प्रमाण नहीं माना जाता? कुछ देशों में पासपोर्ट दिखाते ही आपकी नागरिकता प्रमाणित हो जाती है, जबकि भारत और कनाडा जैसे देशों में इसके लिए अतिरिक्त दस्तावेजों की मांग की जा सकती है। आइए, समझते हैं कि पासपोर्ट और नागरिकता को लेकर दुनिया भर में क्या नियम हैं।
ये देश पासपोर्ट को मानते हैं नागरिकता का सीधा और पक्का सबूत

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दुनिया के कई बड़े और विकसित देशों में अगर आपके पास वहां का वैध पासपोर्ट है, तो उसे नागरिकता का पर्याप्त और अकाट्य प्रमाण माना जाता है। अमेरिका (US), ब्रिटेन (UK), ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों में रोजमर्रा के प्रशासनिक और कानूनी कामों में पासपोर्ट को ही नागरिकता का स्टैंडअलोन (एकमात्र) सबूत मान लिया जाता है। यूरोपीय संघ के कई देश (जैसे इटली, आयरलैंड, साइप्रस) भी सामान्य तौर पर पासपोर्ट को नागरिकता का प्राथमिक साक्ष्य स्वीकार करते हैं।
इन देशों में सिर्फ पासपोर्ट काफी नहीं, मांगे जा सकते हैं अन्य दस्तावेज

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कुछ ऐसे भी मजबूत लोकतांत्रिक देश हैं, जहां पासपोर्ट को पहचान का बड़ा जरिया तो माना जाता है, लेकिन कुछ विशेष कानूनी परिस्थितियों में इसे अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता। इन देशों में नागरिकता के आवेदनों, राष्ट्रीयता की समीक्षाओं या अन्य जटिल कानूनी प्रक्रियाओं के दौरान केवल पासपोर्ट पर भरोसा नहीं किया जाता। अधिकारी आपसे सिटिजनशिप सर्टिफिकेट (Citizenship Certificate) या जन्म रिकॉर्ड जैसे अन्य सहायक दस्तावेज पेश करने को कह सकते हैं।
भारत का नियम: पासपोर्ट सिर्फ एक ट्रैवल डॉक्यूमेंट है, नागरिकता का अंतिम सबूत नहीं

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भारत में पासपोर्ट और नागरिकता को लेकर बेहद स्पष्ट और सख्त प्रशासनिक दृष्टिकोण अपनाया जाता है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, पासपोर्ट प्राथमिक रूप से अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला एक 'ट्रैवल डॉक्यूमेंट' (Travel Document) है। इसे स्वचालित रूप से भारतीय नागरिकता का अंतिम या निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता। नागरिकता की स्थिति का निर्धारण करते समय या किसी विवाद की स्थिति में प्राधिकारी अन्य घरेलू नागरिकता दस्तावेजों और रिकॉर्ड्स पर ही भरोसा करते हैं। चीन भी पासपोर्ट के बजाय अपने घरेलू पहचान सिस्टम पर ज्यादा निर्भर करता है।
क्यों पूरी दुनिया में एक समान नियम नहीं है? जानिए असली वजह

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पासपोर्ट को लेकर पूरी दुनिया में एक जैसा कानून न होने के पीछे कई महत्वपूर्ण सुरक्षात्मक और प्रशासनिक कारण हैं। कई बार व्यक्ति की नागरिकता समाप्त हो जाती है या वो उसे छोड़ देता है, लेकिन उसका पासपोर्ट शारीरिक रूप से उसके पास वैध अवधि के साथ बचा रहता है। प्रशासनिक गलतियों या फर्जीवाड़े के जरिए भी गलत तरीके से पासपोर्ट जारी होने की घटनाएं होती हैं। इसी वजह से कई सरकारें जरूरत पड़ने पर पासपोर्ट के पीछे के मुख्य दस्तावेजों की दोबारा जांच करने का अधिकार अपने पास सुरक्षित रखती हैं।
इन छोटे और द्वीपीय देशों में भी है पासपोर्ट की पूरी मान्यता

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महानगरों और बड़े महाद्वीपों के अलावा कई खूबसूरत द्वीपीय और कैरिबियाई देशों में भी वहां के पासपोर्ट को नागरिकता का पक्का सबूत माना जाता है। एंटीगुआ और बारबुडा, बारबाडोस, क्यूबा, ग्रेनाडा, जमैका, इक्वाडोर और जापान जैसे देशों में भी सामान्य परिस्थितियों में पासपोर्ट को नागरिकता का मजबूत कानूनी आधार माना जाता है। सामान्य तौर पर पासपोर्ट आपकी राष्ट्रीयता को दर्शाता है, लेकिन इमिग्रेशन और नागरिकता विवादों के समय देश के आंतरिक नियम ही सर्वोच्च होते हैं।