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IndiGo ने मंगलवार को एक बड़ा झटका देते हुए अपने सीईओ पीटर एल्बर्स के इस्तीफे की घोषणा की. डच मूल के इस टॉप अधिकारी का कार्यकाल सितंबर 2022 से चला आ रहा था, लेकिन हालिया परिचालन संकट के बाद उनका जाना तय हो गया. वर्तमान में प्रबंध निदेशक राहुल भाटिया ने कंपनी का अस्थायी प्रभार संभाल लिया है.
पीटर एल्बर्स का अचानक इस्तीफा

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बोर्ड की बैठक में एल्बर्स के इस्तीफे को स्वीकार किया गया. नियामक फाइलिंग में साफ कहा गया कि राहुल भाटिया अंतरिम रूप से प्रबंधन संभालेंगे. यह फैसला कंपनी के लिए महत्वपूर्ण मोड़ है, क्योंकि IndiGo बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखने की जद्दोजहद में है.
परिचालन संकट ने बढ़ाई मुसीबत

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पिछले साल दिसंबर से IndiGo को विमानों की खराबी का सामना करना पड़ा. सैकड़ों उड़ानें रद्द हुईं, तीन लाख से अधिक यात्री फंस गए. इस संकट से कंपनी को करीब 2,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. DGCA ने 22.20 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया.
क्या था इस्तीफे का कारण?

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एल्बर्स ने राहुल भाटिया को पत्र लिखकर निजी कारणों का हवाला दिया. उन्होंने नोटिस पीरियड माफ करने की अपील की. उन्होंने लिखा कि IndiGo की ग्रोथ स्टोरी का हिस्सा बनना सम्मानजनक रहा. भावुक लहजे में उन्होंने कंपनी परिवार को याद किया.
कितनी थी पीटर एल्बर्स की सैलरी?

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एल्बर्स को सालाना लगभग 5 करोड़ रुपये का बेसिक वेतन मिलता था. बोनस और स्टॉक इंसेंटिव जोड़ने पर कुल पैकेज 17 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता था. मार्च 2023 में मैच्योर हुए 67,150 परफॉर्मेंस स्टॉक यूनिट्स का मूल्य ही 12.52 करोड़ रुपये था. उनकी कुल संपत्ति करीब 45 करोड़ रुपये आंकी गई है.
KLM से IndiGo तक का सफर

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इससे पहले एल्बर्स ने डच एयरलाइन KLM का नेतृत्व किया. तीसरे कार्यकाल के बीच ही वहां से विदा हुए. एयर फ्रांस-केएलएम समूह में तनाव के कारण उनका जाना तय हुआ. KLM छोड़ते समय उन्हें 11.9 करोड़ रुपये का सेवरेंस पैकेज मिला.
स्टॉक इंसेंटिव का खास प्रावधान

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जॉइनिंग के समय मिले परफॉर्मेंस स्टॉक यूनिट्स कंपनी का आकर्षक ऑफर थे. ये इक्विटी से जुड़े थे. ऐसे इंसेंटिव्स ने एल्बर्स को दीर्घकालिक प्रतिबद्धता दिखाने के लिए प्रेरित किया. कुल मिलाकर उनका पैकेज शीर्ष स्तर का था.
बाजार पर प्रभाव की आशंका

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इस्तीफे से IndiGo के शेयरों में हलचल हो सकती है. निवेशक नेतृत्व परिवर्तन को सतर्कता से देख रहे हैं. अंतरिम व्यवस्था में राहुल भाटिया की भूमिका अहम होगी. कंपनी को स्थिरता बनाए रखनी होगी.
IndiGo के लिए भविष्य की चुनौतियां

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एल्बर्स के जाने से IndiGo को नया नेतृत्व ढूंढना होगा. परिचालन दक्षता पर फोकस जरूरी है. विमानन क्षेत्र की कड़ी प्रतिस्पर्धा में IndiGo को मजबूत रणनीति अपनानी पड़ेगी. यात्री विश्वास बहाल करना पहली प्राथमिकता होगी.