Unemployment Rate May 2026: देश में बेरोजगारी ने बढ़ाई चिंता, 11 महीनों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा आंकड़ा; शहरों से बदतर गांवों के हालात

Unemployment Update: मई में भारत की बेरोजगारी दर बढ़कर 5.5% हो गई है। हैरानी की बात ये है क‍ि शहरों के मुकाबले ग्रामीण बेरोजगारी 5.1% पर पहुंच गई है। जानिए जॉब मार्केट में आफत क्‍यों मची है।

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देश की आर्थिक सेहत और जॉब मार्केट को लेकर सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों ने चिंता बढ़ा दी है। सरकार के पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) से जारी डेटा में युवाओं के रोजगार में लगातार तनाव की बात सामने आई है। पिछले कुछ महीनों से लगातार बढ़ रही बेरोजगारी दर (Unemployment Rate) मई के महीने में पिछले 11 महीनों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस बार शहरों के मुकाबले ग्रामीण इलाकों (गांवों) में रोजगार का संकट ज्यादा गहरा गया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। आइए, आसान भाषा में समझते हैं कि देश में नौकरी और काम-काज का ताजा हाल क्या है।

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बेरोजगारी दर 11 महीने के उच्चतम स्तर पर, लगातार चौथे महीने उछाल

बेरोजगारी दर 11 महीने के उच्चतम स्तर पर, लगातार चौथे महीने उछाल2 / 5

नौकरी और रोजगार के मोर्चे पर मई का महीना अच्छा साबित नहीं हुआ है, सरकारी आंकड़ों में साफ गिरावट दिख रही है। देश में कुल बेरोजगारी दर अप्रैल के 5.2 फीसदी से बढ़कर मई में 5.5 फीसदी हो गई है। यह लगातार चौथा महीना है जब बेरोजगारी दर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले 11 महीनों में यह देश का सबसे खराब आंकड़ा माना जा रहा है। यह भी पढ़ें : मानसून में 28% की कमी: किसानों की कमाई घटने की आशंका, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जताई चिंता

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गांवों में बढ़ी आफत, पर शहरों में मामूली राहत; जानिए दोनों का अंतर

गांवों में बढ़ी आफत, पर शहरों में मामूली राहत; जानिए दोनों का अंतर3 / 5

ताजा आंकड़ों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि भारत की आत्मा कहे जाने वाले गांवों में लोगों को काम नहीं मिल रहा है। ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी दर अप्रैल के 4.6 फीसदी से सीधे उछलकर मई में 5.1 फीसदी पर पहुंच गई है। यानी गांवों में रोजगार के मौके तेजी से कम हुए हैं। इसके विपरीत, शहरों में स्थिति थोड़ी सुधरी है। शहरी बेरोजगारी दर मई में घटकर 6.4 फीसदी पर आ गई है, जो अप्रैल में 6.6 फीसदी थी। इससे साफ है कि शहरों में नौकरी के अवसर गांवों से बेहतर रहे। यह भी पढ़ें : RBI New Rule: अब बैंक नहीं बेच पाएंगे आपकी मर्जी के बिना कोई भी फालतू प्रोडक्ट, नियमों में हुए बड़े बदलाव

युवाओं और महिलाओं के सामने बड़ी चुनौती; आर्थिक विकास पर क्या होगा असर?

युवाओं और महिलाओं के सामने बड़ी चुनौती; आर्थिक विकास पर क्या होगा असर?4 / 5

बेरोजगारी का यह बढ़ता आंकड़ा देश के घरेलू बजट और कुल विकास दर (GDP) दोनों के लिए एक वार्निंग सिग्नल है। गांवों में महिलाओं के लिए काम के मौके बेहद सीमित हो गए हैं, वहीं पढ़े-लिखे युवाओं में भी काम न मिलने को लेकर हताशा बढ़ रही है। जब लोगों के पास रोजगार होता है, तो उनकी आय बढ़ती है और वे बाजार में खरीदारी करते हैं। लेकिन बेरोजगारी बढ़ने से लोग खर्च कम कर देते हैं, जिससे उपभोक्ता खर्च (Consumer Spending) प्रभावित होता है और देश की आर्थिक रफ्तार धीमी पड़ सकती है।

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सिर्फ बेरोजगारी ही नहीं, काम करने वालों की संख्या (WPR) भी घटी

सिर्फ बेरोजगारी ही नहीं, काम करने वालों की संख्या (WPR) भी घटी5 / 5

बाजार में नया रोजगार पैदा होने की रफ्तार बेहद सुस्त पड़ गई है, जिसे इन दो तकनीकी आंकड़ों से आसानी से समझा जा सकता है। लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (काम की तलाश करने वाले लोग) मई में घटकर 54.4 फीसदी रह गया, जो अप्रैल में 55 फीसदी था। वास्तव में कितने लोगों के पास काम है (WPR), यह आंकड़ा भी 52.2 फीसदी से घटकर 51.4 फीसदी पर आ गया है। इसका मतलब है कि जितनी तेजी से लोग काम की तलाश में बाजार में आ रहे हैं, उस रफ्तार से नई नौकरियां पैदा नहीं हो पा रही हैं।

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लेखक के बारे में

Vandana Bharti

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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