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दुनिया के नक्शे पर इस वक्त मिडिल ईस्ट के युद्ध और वैश्विक अनिश्चितता का भारी शोर है. कहीं तेल की कीमतों में उछाल है, तो कहीं सप्लाई चेन टूटने का डर. लेकिन इस शोर के बीच भारत से एक ऐसी खबर आई है जो हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा कर देगी. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी दूसरे अग्रिम अनुमान (Second Advance Estimates) ने यह साबित कर दिया है कि विपरीत परिस्थितियों में भी भारत का अन्नदाता देश की नींव को कितना मजबूत बनाए हुए है. तमाम अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों और बढ़ती खाद-ईंधन की कीमतों के बावजूद, भारत न केवल अपनी खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है, बल्कि रिकॉर्ड-तोड़ पैदावार के साथ दुनिया के लिए सुरक्षा कवच बनकर खड़ा है. आइए, देखते हैं कि कैसे हमारे किसानों की मेहनत ने वैश्विक संकट के बीच भी देश की थाली को सुरक्षित और समृद्ध बना दिया है.
रिकॉर्ड तोड़ खाद्यान्न, खुशहाल भारत की तस्वीर

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अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच भारत की खाद्य सुरक्षा का सुरक्षा कवच तैयार है. साल 2025-26 में खरीफ और रबी सीजन का संयुक्त खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर है. पिछले साल के मुकाबले हमने 3% से ज्यादा की छलांग लगाई है.
चावल और गेहूं- देश की थाली का बादशाह

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भारत की थाली सुरक्षित है. खरीफ चावल 1239.28 लाख मीट्रिक टन के रिकॉर्ड स्तर पर है, वहीं गेहूं का उत्पादन 1202.10 लाख मीट्रिक टन को पार कर गया है. ये आंकड़े बताते हैं कि हम न केवल अपनी जरूरतें पूरी कर रहे हैं, बल्कि विश्व को खिलाने का दम रखते हैं.
दालों का दमदार प्रोडक्शन

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दालों की बढ़ती कीमतें अब नहीं डराएंगी. चने का रिकॉर्ड 117.92 लाख मीट्रिक टन उत्पादन और अरहर-मसूर की मजबूत पैदावार यह सुनिश्चित करती है कि रसोई का बजट बिगड़ने नहीं पाएगा. दाल है, तो खुशहाली है.
वैश्विक संकट बनाम भारतीय सुरक्षा कवच

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मिडिल ईस्ट में ईरान-इजरायल युद्ध से भले ही तेल और खाद की कीमतें ऊपर-नीचे हों, लेकिन भारत का बंपर उत्पादन एक सुरक्षा कवच की तरह है. अनाज की कोई कमी नहीं होगी और घरेलू कीमतें नियंत्रण में रहेंगी.
शिवराज सिंह चौहान का मिशन आत्मनिर्भरता

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कृषि मंत्रालय के इस दूसरे अग्रिम अनुमान को मंजूरी देते हुए मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट कर दिया है, भारत का लक्ष्य सिर्फ उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर और विकसित कृषि व्यवस्था बनाना है.