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तैयार हो जाइए! 1 अप्रैल 2026 से आपकी आर्थिक जिंदगी बदलने वाली है। दशकों पुराने टैक्स नियमों को अलविदा कहकर भारत एक नए और सरल इनकम टैक्स एक्ट 2025 में प्रवेश कर रहा है। चाहे आप किराए के मकान में रहने वाले सैलरीड प्रोफेशनल हों या नई कार खरीदने का सपना देख रहे हों, ये 10 बदलाव सीधे आपकी जेब पर असर डालेंगे। क्या आपको अब भी अपनी LIC पॉलिसी के लिए PAN देना होगा? और बेंगलुरु-पुणे वालों का टैक्स कैसे कम होगा? आइए, इस फोटो गैलरी के जरिए जानते हैं टैक्स की नई दुनिया की हर बारीक जानकारी।
65 साल पुराने कानून की विदाई

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भारत सरकार 1961 के पुराने आयकर अधिनियम को बदलकर नया आयकर अधिनियम 2025 लागू करने जा रही है। यह 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा। इसका उद्देश्य टैक्स नियमों को सरल और पारदर्शी बनाना है।
कैश लेन-देन पर अब सालाना नजर

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अब एक दिन में Rs 50000 की सीमा के बजाय सालाना Rs 10 लाख से ज्यादा कैश जमा या निकासी पर PAN अनिवार्य होगा। यानी अब सरकार आपकी रोज की छोटी बैंकिंग के बजाय साल भर के कुल कैश फ्लो पर नजर रखेगी।
इन 4 शहरों के नौकरीपेशा लोगों की बढ़ेगी बचत (HRA)

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बेंगलुरु, पुणे, अहमदाबाद और हैदराबाद को अब मेट्रो सिटी का दर्जा मिलेगा। यहां रहने वाले कर्मचारियों को अब बेसिक सैलरी का 50% HRA छूट मिलेगी (पहले 40% थी), जिससे उनका टैक्स काफी कम हो जाएगा।
महंगी बाइक और स्कूटर खरीदना हुआ ट्रैक

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पहले टू-व्हीलर खरीदने पर PAN की जरूरत नहीं थी, लेकिन अब Rs 5 लाख से महंगे दोपहिया वाहनों के लिए PAN अनिवार्य होगा। साथ ही, सभी वाहनों (कारों) के लिए भी यही Rs 5 लाख की लिमिट लागू होगी।
इंश्योरेंस प्रीमियम अब Rs 1 का भी बीमा तो PAN जरूरी

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अभी तक Rs 50,000 से ज्यादा के प्रीमियम पर ही PAN देना पड़ता था। नए नियमों के मुताबिक, अब हर तरह के इंश्योरेंस प्रीमियम के भुगतान के लिए PAN देना अनिवार्य होगा, चाहे रकम कितनी भी कम क्यों न हो।
प्रॉपर्टी और गिफ्ट्स पर भी सख्ती

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अचल संपत्ति (मकान/प्लॉट) के लेन-देन में PAN की सीमा Rs 10 लाख से बढ़ाकर Rs 20 लाख कर दी गई है। इसमें अब गिफ्ट में मिली प्रॉपर्टी और जॉइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट (JDA) को भी स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है।
होटल और इवेंट्स पर खर्च की सीमा बढ़ी

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शादियों या होटल के बिलों के भुगतान के लिए PAN देने की सीमा को Rs 50,000 से बढ़ाकर ₹1 लाख कर दिया गया है। यानी अब बड़े आयोजनों के बिल पेमेंट में थोड़ी कागजी राहत मिलेगी।
क्रिप्टो करंसी पर कसता शिकंजा

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नए एक्ट में क्रिप्टो एक्सचेंजों के लिए रिपोर्टिंग नियम और कड़े कर दिए गए हैं। अब क्रिप्टो ट्रेडिंग की हर जानकारी सरकार तक पहुंचेगी, जिससे टैक्स चोरी रोकना आसान होगा।
डिजिटल रुपया (CBDC) को मिली आधिकारिक पहचान

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आरबीआई के डिजिटल ई-रुपये (CBDC) को अब आयकर नियमों के तहत भुगतान का वैध इलेक्ट्रॉनिक मोड माना जाएगा। टैक्स अनुपालन के लिए अब आप डिजिटल करेंसी का इस्तेमाल कर सकेंगे।
भारी भरकम फॉर्म्स और नियमों से आजादी

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सबसे बड़ा सुधार यह है कि नियम 511 से घटकर 333 रह गए हैं और टैक्स फॉर्म्स की संख्या 399 से कम होकर 190 कर दी गई है। टैक्स फाइल करना अब पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज होगा।