Income Tax: बदल गए ITR फाइल करने के नियम! वेतनभोगी से लेकर बिजनेसमैन तक, जानें नए फॉर्म में क्या-क्या बदला
इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने वालों के लिए यह खबर बेहद महत्वपूर्ण है। सरकार ने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए नए फॉर्म जारी कर दिए हैं, जिनमें पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नियमों को काफी सख्त किया गया है।

अगर आप भी टैक्सपेयर हैं, तो इस बार रिटर्न फाइल करने से पहले अपनी तैयारी पक्की कर लें। इनकम टैक्स विभाग ने वित्त वर्ष 2025-26 (AY 2026-27) के लिए नए ITR फॉर्म्स नोटिफाई कर दिए हैं। इस बार सरकार ने डिस्क्लोजर यानी जानकारी देने के नियमों को काफी कड़ा कर दिया है ताकि टैक्स चोरी पर लगाम कसी जा सके।
ITR-1 (सहज): घर खरीदारों को बड़ी राहत
2 / 6₹50 लाख तक की सालाना आय वालों के लिए यह फॉर्म अब और आसान हो गया है। अब आप दो हाउस प्रॉपर्टी से होने वाली आय की जानकारी सीधे ITR-1 में दे सकते हैं। ₹1.25 लाख तक के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) की जानकारी भी अब इसी फॉर्म के जरिए दी जा सकेगी।
ITR-2: क्रिप्टो और विदेशी संपत्ति पर पैनी नजर
3 / 6स्टॉक मार्केट और अन्य निवेश से कमाई करने वालों के लिए ITR-2 में अब विदेशी आय, विदेशी संपत्ति और क्रिप्टो होल्डिंग्स की बारीकी से जानकारी देनी होगी। हालांकि, 23 जुलाई 2024 से पहले और बाद के कैपिटल गेन का अलग-अलग ब्रेकअप देने की अब जरूरत नहीं होगी।
ITR-3 और ITR-4: ट्रेडर्स की बढ़ी टेंशन
4 / 6अगर आप Intraday या F&O (फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस) में ट्रेडिंग करते हैं, तो अब आपको एक-एक पैसे का हिसाब देना होगा। आपके द्वारा दी गई जानकारी का सीधा मिलान आपके AIS (Annual Information Statement) और GST टर्नओवर से किया जाएगा। कोई भी गड़बड़ी होने पर तुरंत नोटिस आ सकता है। ITR-4 भरने वाले छोटे व्यापारियों के लिए कुछ मामलों में अपना बैंक बैलेंस बताना अब अनिवार्य होगा।
कौन सा फॉर्म किसके लिए है?
5 / 6फॉर्म किसके लिए है? ITR-1 ₹50 लाख तक सैलरी, पेंशन और 1-2 घरों से आय वाले निवासी। ITR-2 कैपिटल गेन्स, विदेशी संपत्ति या ₹50 लाख से अधिक आय वाले (बिना बिजनेस आय)। ITR-3 शेयर बाजार के ट्रेडर्स, प्रोफेशनल्स और बिजनेस करने वाले लोग। ITR-4 छोटे व्यापारी और फ्रीलांसर जो 'प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन' चुनते हैं।
टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं
6 / 6भले ही फॉर्म भरने के तरीके और जानकारी मांगने के नियमों में बड़े बदलाव हुए हों, लेकिन सरकार ने टैक्स स्लैब रेट्स (पुरानी और नई रिजीम) में कोई बदलाव नहीं किया है। ये सभी बदलाव इनकम टैक्स एक्ट, 2025 के तहत किए गए हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य टैक्स प्रक्रिया को सरल बनाना और पारदर्शिता बढ़ाना है।