The Untold Story: धीरूभाई अंबानी से पहले यह गुजराती था ऑयल किंग, जिनके घर ठहरते थे महात्मा गांधी; जानें इस कंपनी की दास्तां
भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास के पन्नों से एक ऐसे गुमनाम नायक की दास्तां, जिन्होंने धीरूभाई अंबानी से कई दशक पहले पेट्रोलियम की दुनिया पर राज किया था। आइये इस अनसुनी कहानी के बारे में आपको बताते हैं:

जब भी भारत में तेल, रिफाइनिंग या पेट्रोलियम साम्राज्य की बात होती है, तो हमारे जेहन में सबसे पहला नाम रिलायंस इंडस्ट्रीज और धीरूभाई अंबानी का आता है। धीरूभाई अंबानी ने 1958 में कदम रखा और 1980-90 के दशक में जामनगर रिफाइनरी के जरिए दुनिया में अपना डंका बजाया। लेकिन भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास के पन्नों को अगर थोड़ा और पीछे पलटा जाए, तो रिलायंस से कई दशक पहले गुजरात के ही एक और दिग्गज ने तेल की दुनिया में अपना साम्राज्य खड़ा किया था। वे कोई और नहीं, बल्कि जामनगर में जन्मे सर अब्दुल करीम अब्दुल शकूर जमाल थे, जिन्हें दुनिया ऑयल किंग के नाम से जानती थी। आइए आज आपको रूबरू कराते हैं इतिहास के इस भव्य और गुमनाम औद्योगिक साम्राज्य से।
जामनगर से बर्मा का सफर: किंग ऑफ राइस बनने की कहानी
2 / 5सर अब्दुल करीम जमाल का जन्म 1862 में गुजरात के जामनगर में हुआ था। लेकिन किस्मत उन्हें बचपन में ही उनके परिवार के साथ बर्मा (अब म्यांमार) के रंगून (यंगून) ले गई। वहां उन्होंने अपनी तीक्ष्ण व्यावसायिक सूझबूझ से 'जमाल ब्रदर्स एंड कंपनी लिमिटेड' की नींव रखी। अब्दुल करीम जमाल का कारोबार सिर्फ किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं था। उन्होंने कपास, रबर, चाय, चीनी, खनन और लकड़ी के व्यापार में अपना सिक्का जमाया। उस दौर में बर्मा के चावल व्यापार पर उनका ऐसा एकाधिकार (Monopoly) था कि लोग उन्हें किंग ऑफ राइस की उपाधि देने लगे थे।
कैसे बने बर्मा के ऑयल किंग और खड़ी की IBP?
3 / 5चावल के बाद अब्दुल करीम जमाल की पारखी नजरों ने ब्रिटिश इंडिया के उभरते हुए तेल बाजार की असीम संभावनाओं को पहचान लिया। उन्होंने जमाल ऑयल कंपनी लिमिटेड की शुरुआत की। आगे चलकर साल 1909 में इस कंपनी का पुनर्गठन हुआ और जन्म हुआ एक ऐतिहासिक नाम का इंडो-बर्मा पेट्रोलियम कंपनी लिमिटेड (IBP)। उस दौर में जब तेल के पूरे बाजार पर ब्रिटिश और विदेशी कंपनियों का एकछत्र राज था, तब IBP भारत और बर्मा के बीच पेट्रोलियम डिस्ट्रीब्यूशन और मार्केटिंग में सबसे बड़ी स्वदेशी और प्रामाणिक ताकत बनकर उभरी। पेट्रोलियम सेक्टर में उनके इसी दबदबे और भारी निवेश ने उन्हें 'राइस किंग' से 'ऑयल किंग' बना दिया।
जमाल विला और महात्मा गांधी का नाता
4 / 5सर अब्दुल करीम जमाल सिर्फ एक बड़े उद्योगपति ही नहीं थे, बल्कि उनके दिल में राष्ट्रवाद की भावना भी कूट-कूट कर भरी थी। रंगून में स्थित उनका आलीशान बंगला जमाल विला (Jamal Villa) उस दौर में भारतीय प्रवासियों और राष्ट्रवादी नेताओं का सबसे बड़ा गढ़ हुआ करता था। खुद राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जब भी बर्मा के दौरे पर जाते थे, तो वे अक्सर सर अब्दुल करीम जमाल के मेहमान बनते थे और इसी 'जमाल विला' में ठहरते थे।
98 साल का शानदार सफर और IOCL में महाविलय
5 / 5वर्ष 1924 में सर अब्दुल करीम जमाल इस दुनिया को अलविदा कह गए, लेकिन उनके द्वारा स्थापित की गई कंपनी IBP ने भारतीय पेट्रोलियम सेक्टर में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराए रखी। एक स्वतंत्र तेल कंपनी के रूप में इस साम्राज्य ने लगभग 98 सालों तक शानदार सफर तय किया। आखिरकार, साल 2007 में भारत सरकार ने देश के पेट्रोलियम ढांचे को और मजबूत करने के लिए IBP का विलय देश की सबसे बड़ी सरकारी तेल कंपनी 'इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड' (IOCL) में कर दिया। आज भले ही IBP का नाम इतिहास का हिस्सा हो, लेकिन 'ऑयल किंग' सर अब्दुल करीम जमाल का योगदान भारत के औद्योगिक इतिहास में हमेशा अमर रहेगा।