8th Pay Commission: सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में हो सकता है बंपर इजाफा, जानें क्या है 5 यूनिट फैमिली वाला फॉर्मूला?
8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) में फैमिली यूनिट के नए फॉर्मूले की एंट्री हो गई है। इस नए फॉर्मूले का सरकारी कर्मचारियों की सैलरी पर क्या असर पड़ने वाला है, पूरी डिटेल यहां जानें।

क्या होता है फैमिली यूनिट फॉर्मूला?
2 / 7वेतन आयोग सैलरी तय करने से पहले यह देखता है कि एक औसत कर्मचारी के परिवार को जीने के लिए न्यूनतम कितने पैसों की जरूरत है। इसी खर्च के अनुमान को 'बेस' मानकर न्यूनतम वेतन (Minimum Pay) तय किया जाता है।
अब तक क्या था नियम?
3 / 7दशकों से परिवार को 3 यूनिट माना जाता था। इसमें केवल पति-पत्नी और बच्चों के बुनियादी भोजन और कपड़ों के खर्च को जोड़ा जाता था। यूनियनों का कहना है कि 2026 के दौर में पुराने खर्चों के आधार पर सैलरी तय करना नाइंसाफी है, क्योंकि अब शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च कई गुना बढ़ गया है।
नई मांग: 5-यूनिट वाली बड़ी फैमिली
4 / 7कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि अब गणना 5.2 यूनिट (राउंड ऑफ 5) पर हो। खुद कर्मचारी (1 यूनिट), पत्नी (1 यूनिट), 2 बच्चे (0.8-0.8 यूनिट) और माता-पिता (0.8 यूनिट)। बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल भी अब सैलरी का हिस्सा होनी चाहिए।
₹69,000 हो सकती है न्यूनतम बेसिक सैलरी!
5 / 7अगर 5-यूनिट फॉर्मूला माना गया, तो न्यूनतम बेसिक पे ₹69,000 तक पहुंच सकती है। इसमें न सिर्फ रोटी-कपड़ा, बल्कि मोबाइल बिल, इंटरनेट, बच्चों की भारी स्कूल फीस और मनोरंजन के खर्चों को भी शामिल किया गया है।
फिटमेंट फैक्टर पर सुनामी असर
6 / 7इस नए फॉर्मूले के आधार पर फिटमेंट फैक्टर 3.833 तक जा सकता है। जब आधार (Foundation) ऊंचा होगा, तो इसके ऊपर मिलने वाले सभी भत्ते (Allowances) और पेंशन भी अपने आप बढ़ जाएंगे।
शहरी जीवन की कड़वी हकीकत
7 / 7यूनियनों का कहना है कि शहर में रहने वाले कर्मचारी को अब पानी के बिल, स्किल डेवलपमेंट और त्योहारों के लिए अलग से बजट चाहिए। माता-पिता को शामिल करने के लिए 'माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक कल्याण अधिनियम' का हवाला दिया गया है।
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