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जब भी नए वेतन आयोग की बात होती है, तो चर्चा फिटमेंट फैक्टर या डीए (DA) पर सिमट जाती है। लेकिन इस बार पर्दे के पीछे एक ऐसा 'सीक्रेट फॉर्मूला' चर्चा में है जो आपकी सैलरी की पूरी गणित बदल सकता है। इसे कहते हैं फैमिली यूनिट (Family Unit)। कर्मचारी यूनियनों ने मांग की है कि सैलरी तय करते समय अब परिवार को 3 नहीं बल्कि 5 यूनिट माना जाए। आइए समझते हैं कि क्या है यह फॉर्मूला और कैसे यह आपकी जेब भरेगा।
क्या होता है फैमिली यूनिट फॉर्मूला?

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वेतन आयोग सैलरी तय करने से पहले यह देखता है कि एक औसत कर्मचारी के परिवार को जीने के लिए न्यूनतम कितने पैसों की जरूरत है। इसी खर्च के अनुमान को 'बेस' मानकर न्यूनतम वेतन (Minimum Pay) तय किया जाता है।
अब तक क्या था नियम?

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दशकों से परिवार को 3 यूनिट माना जाता था। इसमें केवल पति-पत्नी और बच्चों के बुनियादी भोजन और कपड़ों के खर्च को जोड़ा जाता था। यूनियनों का कहना है कि 2026 के दौर में पुराने खर्चों के आधार पर सैलरी तय करना नाइंसाफी है, क्योंकि अब शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च कई गुना बढ़ गया है।
नई मांग: 5-यूनिट वाली बड़ी फैमिली

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कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि अब गणना 5.2 यूनिट (राउंड ऑफ 5) पर हो। खुद कर्मचारी (1 यूनिट), पत्नी (1 यूनिट), 2 बच्चे (0.8-0.8 यूनिट) और माता-पिता (0.8 यूनिट)। बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल भी अब सैलरी का हिस्सा होनी चाहिए।
₹69,000 हो सकती है न्यूनतम बेसिक सैलरी!

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अगर 5-यूनिट फॉर्मूला माना गया, तो न्यूनतम बेसिक पे ₹69,000 तक पहुंच सकती है। इसमें न सिर्फ रोटी-कपड़ा, बल्कि मोबाइल बिल, इंटरनेट, बच्चों की भारी स्कूल फीस और मनोरंजन के खर्चों को भी शामिल किया गया है।
फिटमेंट फैक्टर पर सुनामी असर

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इस नए फॉर्मूले के आधार पर फिटमेंट फैक्टर 3.833 तक जा सकता है। जब आधार (Foundation) ऊंचा होगा, तो इसके ऊपर मिलने वाले सभी भत्ते (Allowances) और पेंशन भी अपने आप बढ़ जाएंगे।
शहरी जीवन की कड़वी हकीकत

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यूनियनों का कहना है कि शहर में रहने वाले कर्मचारी को अब पानी के बिल, स्किल डेवलपमेंट और त्योहारों के लिए अलग से बजट चाहिए। माता-पिता को शामिल करने के लिए 'माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक कल्याण अधिनियम' का हवाला दिया गया है।