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अगर आपकी कार चलते समय एक तरफ जाने लगे, स्टीयरिंग सीधा न रहे या फिर पहले जैसी माइलेज न मिले तो हर बार इंजन को जिम्मेदार मानना सही नही है. कीी बार इसकी वजह टायर में कम हवा या खराब व्हील अलाइनमेंट होती है.
स्टीयरिंग से मिलते हैं खराब अलाइनमेंट के संकेत

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अगर सीधी सड़क पर गाड़ी चलाते समय स्टीयरिंग व्हील सीधा रखने के बाद भी टेढ़ा नजर आए या कार अपने आप एक तरफ जाने लगे, तो ये व्हील अलाइनमेंट बिगड़ने की संकेत हो सकता है. ऐसी स्थिति में जल्द से जल्द जांच कराना बेहतर होता है.
टायर का असमान घिसना भी है चेतावनी

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अगर बिना स्टीयरिंग घुमाए कार लगातर दाईं-बाईं तरफ खिंच ही है, तो व्हील अलाइनमेंट चेक करवाना चाहिए. इसके अलावा यदि टायर का सिर्फ अंदरूनी या बाहरी हिस्सा ज्यादा घिस रहा है या ट्रेड बराबर तरीके से खत्म नहीं हो रहा तो, ये यह भी खराब अलाइनमेंट की पहचान है.
स्टीयरिंग भारी लगे या कंपन आए तो रहें सतर्क

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अगर पहले की तुलना में स्टीयरिंग घुमाने ज्यादा ताकत लग रही या ड्राइव करने में वाइब्रेशन और झटके महसूस हो रहे हैं, तो इनकी वजह व्हील अलाइनमेंट या व्हील बैलेंसिंग हो सकती है. ऐसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
कम टायर प्रेशर भी बिगाड़ सकता है परफॉर्मेंस

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कई बार टायर में कम हवा होने से भी कार का परफॉर्मेंस प्रभावित होता है. ऐसी स्थिति में गाड़ी भारी महसूस होती है. माइलेज घट जाती है, टायर तेजी से घिसते हैं और इंजन पर ज्यादा प्रेशर पड़ता है. अगर कार सिर्फ सुस्त लग रही है और एक तरफ नहीं खिंच रही, तो सबसे पहले टायर प्रेशर जरूर चेक करें.
TPMS सिस्टम देता है तुरंत अलर्ट

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आजकर ज्यादातर नई कारों में टायर प्रेशर मॉनिचरिंग सिस्टेम दिया जाता है. इसमें हर टायर में सेंसर लगे होते हैं, जो लगातार हवा का दबाव मापते रहते हैं. जैसै ही किसी टायर का प्रेशर लिमिट से नीचे जाता है सिस्टमें तत्काल कार डिस्प्ले पर अलर्ट दिखा देता है.
व्हील अलाइनमेंट और बैलेंसिंग एक जैसी नहीं हैं

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कई लोग व्हील अलाइनमेंट और व्हील बैलेंसिंग को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन दोनों अलग है. व्हील अलाइनमेंट में पहियों के एंगल को कंपनी के तय मानकों के मुताबिक सेट किया जाता है ताकि कार सीधी चले. वहीं व्हील बैलेंसिंग का काम पहियों के वजन को संतुलित करना होता है, जिससे ड्राइविंग के दौरान कंपन न आए.